पानीपत, 03 जनवरी । समाज सुधार और महिला शिक्षा की अग्रदूत माता सावित्री बाई फुले के योगदान को याद करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रमेश मालिक ने कहा कि उन्होंने महिलाओं को शिक्षा के माध्यम से एक नई राह दिखाई। उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले का जीवन संघर्ष, साहस और सामाजिक बदलाव का प्रतीक है, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
रमेश मालिक ने कहा कि सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने उस दौर में बालिकाओं और वंचित वर्ग की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब महिलाओं को स्कूल जाना भी सामाजिक अपराध माना जाता था। उन्होंने तमाम विरोधों और कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा का दीप जलाया और समाज की रूढ़ियों को तोड़ा।
उन्होंने बताया कि सावित्री बाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने मिलकर बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोला, जिससे महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हुई। शिक्षा को उन्होंने सामाजिक समानता का सबसे मजबूत हथियार माना।
रमेश मालिक ने कहा कि आज के दौर में भी सावित्री बाई फुले के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं। महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और समान अधिकार के बिना समाज का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सावित्री बाई फुले के विचारों को अपनाकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने माता सावित्री बाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
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