पूर्व आईजी अमर सिंह चाहल ठगी के शिकंजे में
पटियाला के पूर्व आईजी अमर सिंह चाहल ठगों की साजिश का शिकार हो गए हैं। उन्हें अधिक पैसा कमाने की लालच देकर जाल में फंसाया गया। यह ट्रिक WhatsApp पर एक खास ग्रुप के जरिये चलती रही, जहां ऐसे कदम बताए जाते थे। इस ग्रुप में पटियाला शहर के कई नामी रिटायर्ड अफसर भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने ऐसे सदस्यों की एक सूची तैयार कर ली है ताकि पहचान की जा सके। कुछ लोग मौखिक तौर पर बयान दे रहे हैं, जबकि लिखित शिकायत कम है। उन्नत पुलिस टीम मामले को लेकर हर कोण से परख कर रही है। कथित समूह ने अमर सिंह चाहल को भी उसी तरीके से जोड़ा था। फिलहाल अधिकारी इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि ग्रुप का असली उद्देश्य क्या था।
धोखाधड़ी की चाल: समूह से समूह तक फंंसना
ग्रुप के भीतर शेयर बाजार, IPO और निवेश योजनाओं पर बार-बार चर्चा होती थी। शुरुआती चरण में थोड़ा पैसा देकर छोटी रिटर्न दिखाकर भरोसा बनाया गया। फिर बड़ी रकम निवेश कराने के लिए दबाव बढ़ाने लगा, जिससे अधिकारी भी फंस गए। यह साजिश कई नामी अफसरों को भी प्रभावित करने लगी, जिन्हें पहले सुरक्षित माना जाता था। पुलिस की तफ्तीश के अनुसार किस अधिकारी ने ग्रुप में रजत वर्मा को जोड़ा, इसकी भी जांच चल रही है। जिस नंबर से चाहल से संपर्क किया गया, उसकी लोकेशन ट्रेसिंग शुरू है। अज्ञात नामों के आधार पर मामला दर्ज है ताकि संदिग्धों को चिह्नित किया जा सके।
जाँच में जुटी पुलिस: कैसे आगे बढ़ेगी कार्रवाई
पुलिस ने साइबर क्राइम सेल में मामला दर्ज किया है। चाहल की पत्नी के बयान पर एफआईआर दर्ज किया गया है और रिकॉर्ड संकलन किया जा रहा है। कथित समूह ने शुरुआती चरण में बेहद छोटे पैसे पर भी रिटर्न दिखाने की चाल चली। फिर बड़ी रकम निवेश कराने के लिए दबाव बढ़ाने लगा, जिससे अधिकारी भी फंस गए। अब जांच यह निर्धारित कर रही है कि कौन से अधिकारी ग्रुप में जुड़े और किस क्रम से शामिल हुए। रजत वर्मा के समूह में योगदान से जुड़ी प्राथमिक राय फैला दी गई है, पर सत्यापन जारी है। फोरेंसिक आज भी यह देख रहा है कि ग्रुप से जुड़े नंबरों की वास्तविक पहचान क्या है।
आगे की राह: सुरक्षा उपाय और सहायता के स्रोत
यह मामला बड़े जोखिम के संकेत देता है कि वरिष्ठ अधिकारी भी इस प्रकार के जाल में आ सकते हैं। पुलिस ने सभी संदिग्ध नामों को छानना शुरू कर दिया है ताकि ठगी का दायरा स्पष्ट हो सके। लोगों से अपील है कि किसी भी तरह के भारी निवेश से पहले सख्ती से जाँच लें। ध्यान दें कि ऐसी ठगी अक्सर फर्जी नाम और नंबरों से चलती है। संकेत मिलने पर आप राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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