फिरोजपुर: दहेज के लिए दंपती ने की नकली शादी, पकड़े गए

फिरोजपुर, पंजाब में एक पति-पत्नी सामुदायिक या सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फिर से शादी करने पहुंच गए, लेकिन उनकी मंशा जल्द ही खुलकर सामने आ गई। आयोजनों के दौरान जोड़ों को सोफा, बेड, अलमारी और कपड़े जैसी जरूरी मदद भी दी जा रही थी ताकि वे परंपरागत मिलन की रस्में निभाते दिखाई दें। इसी मौके पर लालच के चक्कर में वे लावां भी ले आये, यानी समारोह के रीति-रिवाज का लाभ उठाने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम के दौरान गांव के सरपंच के बेटे ने उनकी पहचान कर ली, जिससे मामले की गहराई साफ तौर पर सामने आ गई। इस तरह की घटनाओं को लेकर समाज में संतोषजनक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। इस मामले को आप समूह विवाह के संदर्भ में देख रहे हैं, जिसे कई बार समुदायों के बीच व्यापक सामाजिक पहल के तौर पर माना गया है।

संस्था के सदस्य बताते हैं कि समारोह के आयोजन और चयन प्रक्रिया के समय कुछ दंपति गलत जानकारी देकर आवेदन करते हैं, ताकि उन्हें पहले से मिली उपकृत सुविधाओं का लाभ मिल सके। कार्यक्रम के मुख्य प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि दंपतियों को सोफा, बेड, अलमारी और कपड़े जैसी सहायता संस्थागत स्तर पर दी जाती है, और रजिस्ट्रेशन के वक्त भी सख्ती से जानकारी की पुष्टि की जाती है। हालांकि, हर बार सभी डेटा सही नहीं निकलते, फिर भी चयनित दंपतियों की पुष्टि सत्यापन के बाद ही की जाती है। इस बार भी संदेह के आधार पर इन दोनों दम्पतियों की गहन जाँच की गई और पाया गया कि उन्होंने सामूहिक विवाह के लिए आवेदन करते समय झूठी जानकारी दी थी।

घटना के बाद आयोजक दल ने तेजी से कदम उठाते हुए दोनों दंपतियों को कार्यक्रम से बाहर कर दिया। संस्था के लोगों के अनुसार, झूठी जानकारी देकर भय-प्रतिष्ठा या लाभ उठाने की कोशिश करना नियमों के ठीक खिलाफ है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दंपतियों ने द्वितीय विवाह के लिए आवेदन किया था, जो कि इस कार्यक्रम के मानदंडों के अनुरूप नहीं है और नियमों के विरुद्ध माना जाता है। इसे लेकर संस्था ने आगे की कड़ाई से नियमों के पालन पर जोर दिया है और स्थानीय प्रशासन के साथ भी समन्वय रखा जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे दुरुपयोग न हो सके।

कार्यक्रम के मुख्य प्रबंधक ने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे अवसरों का उद्देश्य सामाजिक समरसता बढ़ाना और जरूरतमंद जोड़ों की सहायता करना है, न कि किसी तरह की धोखाधड़ी का जरिया बनना। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे विवाह के लिए आवेदन करना, विशेषकर उसी कार्यक्रम के भीतर, नियमों के गंभीर उल्लंघन के समान है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह मामला पंजाब में सामूहिक विवाह योजना के प्रबंधन और पारदर्शिता के विषय पर सवाल उठाता है, क्योंकि वास्तविक जरूरतमंद जोड़ों तक मद्द के वितरण का उद्देश्य है। पंचायत और संस्था के बीच शिकायत-निवारण प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

पूरा मामला इस बात की भी ओर इशारा करता है कि किसी भी समाजिक योजना के लाभ उठाने के लिए सत्यापित और वैध पंजीकरण कितने अहम होते हैं। सरकार और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए यह एक सचेतक संदेश है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा। अगर आप इस प्रकार के सामाजिक पहल की सबसे ताजा खबरों से अपडेट रहना चाहते हैं, तो साथ-साथ देखें तथा पढ़ें—समूह विवाह पर व्यापक जानकारी और सामूहिक विवाह से जुड़ी अन्य खबरें।

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