मुख्य जानकारी
भास्कर न्यूज के अनुसार जालंधर आर्य समाज मंदिर में साहिबजादों के बलिदान दिवस का अवसर था। यह आयोजन शहीद भगत सिंह नगर में किया गया। प्रमुख यजमान थे तरुण सिंह बेदी, मुस्कान बेदी, हरविंदर सिंह, रविंद्र कौर, सुरेंद्र कुमार कालिया, किरण कालिया और राज सेठ। सभी ने वेदी पर आहुतियां डालकर श्रद्धापूर्वक भाग लिया। यज्ञ को आचार्य सुशील आर्य और वेदपाठी अनुराग विद्यालंकार ने विधिपूर्वक संपन्न करवाया। इसके बाद भारती शर्मा ने यज्ञ प्रार्थना प्रस्तुत की। सुरेंद्र सिंह गुलशन ने साहिबजादों के बलिदान पर आधारित भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। आचार्य ने चार साहिबजादों के बारे में स्पष्ट रूप से बताया कि वे गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र थे। बड़े साहिबजादों ने धर्म की रक्षा में वीरगति पाई, जबकि छोटे साहिबजादों की शहादत इतिहास की हृदयस्पर्शी घटनाओं में से एक है। इस अवसर पर श्रद्धा और सम्मान की भावना हर तरफ दिखाई दी।
साहिबजादों के बलिदान का संदर्भ
आचार्य सुशील आर्य ने चार साहिबजादों के बारे में स्पष्ट संदेश दिया। वे गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र थे। बड़े साहिबजादों ने धर्म की रक्षा में वीरगति पाई। छोटे साहिबजादों की शहादत इतिहास की हृदयस्पर्शी घटनाओं में से एक है। आचार्य ने कहा गुरु गोबिंद सिंह ने अधर्म के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने सत्य, धर्म और स्वाभिमान के पथ पर मानवता को प्रेरित किया। उधमपुर से आए आचार्य यद्दविंदर ने ईश्वर भक्ति पर आधारित भजन प्रस्तुत किया। यह भजन आर्य समाज के मंच पर भक्तिमय संदेश बनकर गया। श्रोताओं ने गहराई से भक्ति को महसूस किया। साथ ही आर्य समाज के मंच पर अनुशासन और शांति की धारणा बनी। आचार्यों ने दर्शन और प्राण-भक्ति के योग पर प्रकाश डाला। सबने एक-दूसरे के साथ प्रेम और सम्मान का अनुभव किया। मंच पर बच्चों, युवाओं और बुजर्गों में धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीयता की प्रेरणा उभरी।
कार्यक्रम का समापन और श्रद्धांजलि
सभा के अंत में प्रधान रणजीत आर्य ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद कहा। कार्यक्रम का मंच संचालन हर्ष लखनपाल ने किया। इस मौके पर डॉ. सुधीर शर्मा और जसप्रीत सिंह जौली मौजूद थे। हरप्रीत कौर, सुरेंद्र खन्ना, ओम प्रकाश मेहता समेत कई सदस्य उपस्थित रहे। चौ. Hari Chandra, राजीव शर्मा और अनिल कोहली भी पधारे। विजय चावला, त्रिप्ता चावला और सच्चिदानंद सिंह ने आशीर्वाद दिया। आर्य समाज के अन्य सदस्य मंच पर मौजूद रहे और मंत्रोच्चारण किया। कार्यक्रम ने युवाओं में धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीयता की प्रेरणा बढ़ाई। इस आयोजन से समुदाय में श्रद्धा और देशभक्ति की भावना फिर प्रबल हुई। बलिदान के संदेश को याद कर लोग श्रद्धासुमन अर्पित करते रहे। सामाजिक एकता और सामुदायिक सम्मान का उदाहरण बना रहा। आयोजकों ने आगे भी ऐसे कार्यक्रम कराने का आश्वासन दिया। इस अवसर ने समाज को आपसी प्रेम और सौहार्द की दिशा में प्रोत्साहित किया।
आगे की राह और जानकारी
अधिक जानकारी के लिए देखें गुरु गोबिंद सिंह और आर्य समाज पन्ने। इस आयोजन ने समाज में श्रद्धा और देशभक्ति की भावना फिर से जागृत की। समारोह ने सामाजिक एकता और सम्मान का उदाहरण कायम रखा। आयोजकों ने आगे भी ऐसे धार्मिक कार्यक्रम बढ़ाने का संकेत दिया है। गुरु गोबिंद सिंह के पन्ने और आर्य समाज के पन्ने से आप विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से समुदाय को एकजुट रहने की प्रेरणा मिलती है। आगे भी ऐसे कार्यक्रम सामाजिक समरसता को मजबूत करेंगे। हम भी चाहते हैं ऐसे अवसर दोहराते रहें और लोगों के बीच प्रेम-बांट और समर्पण बढ़े।