गुरुग्राम, 18 जनवरी । गुरुग्राम में आयोजित एक सामाजिक विचार-विमर्श कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात सामाजिक चिंतक डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि टूटते परिवार आज के समाज के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और इसके कमजोर होने का सीधा असर सामाजिक संतुलन, बच्चों के मानसिक विकास और युवाओं के व्यवहार पर पड़ता है।
डॉ. जैन ने अपने संबोधन में बताया कि तेज़ शहरीकरण, भागदौड़ भरी जीवनशैली, काम का बढ़ता दबाव, डिजिटल माध्यमों पर अत्यधिक निर्भरता और संवाद की कमी के कारण पारिवारिक रिश्तों में दूरी बढ़ रही है। उन्होंने चिंता जताई कि संयुक्त परिवारों के विघटन और एकल परिवारों में बढ़ते तनाव से बच्चों में अकेलापन, भावनात्मक असुरक्षा और व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि कई सामाजिक समस्याएं—जैसे मानसिक तनाव, अवसाद, नशे की प्रवृत्ति और अपराध की ओर झुकाव—का सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध पारिवारिक विघटन से जुड़ा हुआ है। डॉ. जैन के अनुसार, यदि परिवार मजबूत होंगे तो समाज स्वतः सशक्त बनेगा। इसके लिए परिवार के सदस्यों के बीच संवाद, आपसी सम्मान और एक-दूसरे को समय देना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए और कहा कि स्कूलों, समुदायों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की चुनौती है, जिस पर सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।