सिख गुरुओं की शिक्षाओं और इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से “गुरुओं की वहीर” नामक धार्मिक पैदल यात्रा जालंधर के लम्मा पिंड से श्रद्धा और उत्साह के साथ रवाना हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल हुए। यात्रा की शुरुआत अरदास के साथ की गई और गुरु साहिबान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आयोजकों के अनुसार, गुरुओं की वहीर का मुख्य उद्देश्य सिख इतिहास, गुरु परंपरा और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों और कस्बों में संगत को गुरु साहिबान के जीवन, त्याग और मानवता के संदेशों से अवगत कराया जाएगा।
यात्रा में शामिल श्रद्धालु पैदल चलकर गुरु साहिब की शिक्षाओं का प्रचार कर रहे हैं। मार्ग में जगह-जगह लंगर और जल सेवा की व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रियों और स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयोजकों ने बताया कि यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संचालित की जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने भी यात्रा को लेकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुलिस और स्वयंसेवक पूरे मार्ग पर तैनात हैं, ताकि यात्रा सुरक्षित रूप से अपने निर्धारित पड़ावों तक पहुंच सके।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि इस प्रकार की यात्राएं समाज में आपसी भाईचारे, सेवा और नैतिकता को मजबूत करती हैं। गुरुओं की वहीर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम भी है।
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