हरियाणा सरकार ने एक अहम और चर्चा में रहने वाला फैसला लेते हुए राज्य में लिव-इन-रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य लिव-इन में रह रहे जोड़ों की पहचान सुनिश्चित करना, महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाना बताया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को स्थानीय प्रशासन या निर्धारित पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसमें दोनों पक्षों की पहचान, उम्र, पता और आपसी सहमति से जुड़े विवरण दर्ज किए जाएंगे। पंजीकरण के बाद जोड़ों को एक आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे विवाद, धोखाधड़ी या अपराध की स्थिति में प्रशासन को कार्रवाई में आसानी होगी।
सरकार का कहना है कि कई मामलों में लिव-इन संबंधों को लेकर महिलाओं के शोषण, धोखे और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आती रही हैं। पंजीकरण व्यवस्था से ऐसे मामलों में पीड़ित को कानूनी संरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही नाबालिगों को लिव-इन संबंधों में फंसने से रोकने में भी यह व्यवस्था सहायक होगी।
हालांकि, इस फैसले पर सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे निजी जीवन में दखल बताया है, जबकि कई वर्गों ने महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी कदम करार दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंजीकरण प्रक्रिया सरल और गोपनीय रखी जाती है, तो यह व्यवस्था प्रभावी साबित हो सकती है।
फिलहाल सरकार इस नियम के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश और नियमावली तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में इसे लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना है। हरियाणा का यह फैसला देशभर में लिव-इन-रिलेशनशिप को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।