हरियाणा: पुलिस जांच अधिकारियाें काे मिलेंगे टैब

चंडीगढ़, 29 जनवरी । हरियाणा पुलिस अब अनुसंधान प्रणाली को पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी में है। जांच अधिकारियों (आईओ) को जल्द ही टैब उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे फील्ड से ही केस डायरी, साक्ष्य, रिसर्च और डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट कर सकेंगे। यह ऐलान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) नवदीप सिंह विर्क ने गुरुवार को पंचकूला में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शिविर के समापन के दौरान किया।

दो दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर में 619 पुलिस कर्मियों, 243 अनुसंधान अधिकारियों, 6 पुलिस अधीक्षकों और 22 थाना प्रबंधकों ने हिस्सा लिया। एडीजीपी नवदीप विर्क ने कहा कि साइबर युग में अनुसंधान कार्यों में तकनीक का प्रयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। कम से कम समय में कानून सम्मत जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना इस प्रशिक्षण शिविर का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी थानों में पहले ही कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है और अब सभी आईओ को टैब देने का प्रस्ताव प्रक्रिया में है।

टैब के माध्यम से जांच अधिकारी मौके पर ही साक्ष्य अपलोड कर सकेंगे, डिजिटल मैपिंग, फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजीकरण संभव होगा। इससे न केवल जांच की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि अदालतों में मजबूत और तकनीकी रूप से सशक्त केस पेश किए जा सकेंगे। एडीजीपी विर्क ने कहा कि हरियाणा ढाई करोड़ से अधिक आबादी वाला राज्य है, जो कृषि के साथ-साथ बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर चुका है।

बीपीआरएंडडी से आए विशेषज्ञ गुरशरण ने कहा कि अनाधिकृत कॉलोनियों और अवैध गतिविधियों की निगरानी के लिए ड्रोन मैपिंग, गूगल मैपिंग और डिजिटल साक्ष्यों का उपयोग अनिवार्य होगा। उप-निदेशक अभियोजन दीपक बूरा ने कहा कि अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने में प्रवर्तन ब्यूरो की भूमिका बेहद अहम है और होलमार्किंग सिस्टम इसके लिए प्रभावी हथियार साबित हो सकता है। वहीं उप जिला न्यायवादी विक्रम सिंह ने खनिज संसाधनों के अवैध दोहन को भविष्य की बड़ी आपदाओं का कारण बताते हुए सतर्कता बरतने पर जोर दिया।