आईसीएआर महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट का बीकानेर दौरा,

बीकानेर, 29 जनवरी । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने बीकानेर प्रवास के दौरान आईसीएआर से जुड़े विभिन्न अनुसंधान संस्थानों का भ्रमण व निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुसंधान को बढ़ावा देने और परस्पर बेहतर समन्वय के साथ किसानों के हित में कार्य करने के निर्देश दिए।

डॉ. जाट ने केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (मरू क्षेत्रीय परिसर), केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, मूंगफली अनुसंधान निदेशालय क्षेत्रीय केंद्र, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (अश्व उत्पादन परिसर) तथा राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में आईसीएआर संस्थानों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

अपने संबोधन में डॉ. जाट ने कहा कि शुष्क क्षेत्रों में बागवानी और पशुपालन किसानों की आजीविका का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहे हैं। शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली फल एवं सब्जी फसलें भविष्य में किसानों के लिए नए अवसर सृजित करेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगी।

इस अवसर पर आईसीएएच द्वारा प्रायोजित 21 दिवसीय शीतकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी डॉ. जाट ने विधिवत शुभारंभ किया। निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास भी उपस्थित रहे।

कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने प्राकृतिक खेती में पशुधन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बागवानी फसलों के साथ पशुपालन का समन्वय वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से कृषि एवं पशुपालन के समन्वित मॉडल विकसित करने का आह्वान किया, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके। दौरे के दौरान आईसीएआर संस्थानों के निदेशक, प्रभागाध्यक्ष, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कर्मचारीगण एवं शीतकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागी भी उपस्थित रहे।