भारत सरकार ने लक्खोवाल लाहौर निवासी मोहम्मद रमजान (58), पाकिस्तान के पंजाब निवासी असगर अली और बड़ा पिंड पंजाब निवासी मोहम्मद इकबाल (48) को रिहा किया है। इकबाल को 18 साल की उम्र में एनडीपीएस एक्ट के तहत गुरदासपुर में 10 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने उन्हें 30 साल की सजा सुनाई थी, जिसे वह पूरी तरह काट चुके हैं। रमजान 2010 में जम्मू के रास्ते अवैध रूप से भारतीय सीमा में घुसा था, पकड़े जाने पर उसे साढ़े 13 साल की सजा हुई थी। वह दिल्ली की तिहाड़ जेल से 15 साल बाद लौटा है। इसी तरह असगर अली 2010 में समझौता एक्सप्रेस के जरिए भारत आया था। यहां पर दिल्ली में उसका वीजा अवधि खत्म हो गई और वह जोधपुर चला गया। वहां पकड़े जाने पर उसे 10 साल की सजा हुई थी और उसे जोधपुर जेल में रखा गया और अब वह भी 15 साल बाद लौटा है।
इकबाल ने भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन मेरे लिए ईद जैसा है। 30 साल बाद घर वापसी की खुशी शब्दों में नहीं बताई जा सकती। इकबाल ने यह भी बताया कि उनकी गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़ गई थी। गुरदासपुर जेल से उन्हें राजस्थान शिफ्ट किया गया, जहां उन्होंने अपनी सजा का बड़ा हिस्सा पूरा किया।
प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण माहल ने बताया कि जिन तीन पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया है, उनमें दो राजस्थान की जेलों से और एक दिल्ली पुलिस की हिरासत से लाए गए हैं। सभी के कस्टम, इमिग्रेशन और दस्तावेज की प्रक्रिया पूरी करके उन्हें वाघा के जरिए पाकिस्तानी रेंजर्स को सौंप दिया गया है।