जयपुर: जयपुर टाइगर फेस्टिवल के तहत आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रख्यात ओडिसी नृत्यांगना डॉ. रीला होता ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने ओडिसी नृत्य के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वन्यजीवों की रक्षा का सशक्त संदेश प्रस्तुत किया। नृत्य की मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लयात्मक संरचना के जरिए प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया।
आयोजकों के अनुसार, टाइगर फेस्टिवल का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि वन संरक्षण और बाघ संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाना भी है। डॉ. रीला होता की प्रस्तुति ने इस उद्देश्य को कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ आगे बढ़ाया। उनके नृत्य में वनों की नाजुकता, प्राकृतिक संतुलन और मानव जिम्मेदारी जैसे विषय प्रमुख रहे।
ओडिसी, भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं में से एक है, जो अपनी त्रिभंगी मुद्राओं और अभिनय के लिए जानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से पर्यावरणीय मुद्दों को प्रस्तुत करना समाज में गहरा प्रभाव छोड़ता है, क्योंकि कला भावनाओं से जुड़कर संदेश को व्यापक बनाती है।
फेस्टिवल में मौजूद दर्शकों और प्रकृति प्रेमियों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। आयोजकों ने बताया कि जयपुर टाइगर फेस्टिवल के दौरान आगे भी सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वन्यजीव संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रयासों को मजबूती मिल सके।