जालंधर: SC-ST चेयरमैन ने चुनावी जातीय एकता का ऐलान—क्यों?

2027 विधानसभा चुनाव और दलित नेतृत्व

2027 के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है. राजनीतिक गलियारों में दलित नेतृत्व की स्थिति पर चर्चा बढ़ी है. एससी-एसटी आयोग के चेयरमैन ने नए साल के संकेत दिए हैं. जसबीर सिंह गढ़ी पंजाब के लिए संदेश दे रहे हैं. उन्होंने कहा दलितों को यह तय करना होगा कि उनका नेतृत्व कौन करेगा. पंजाब के भीतर विधानसभा में कौन उनकी आवाज उठाएगा, यह सवाल 2027 में साफ होगा. याद रखें, आपकी लड़ाई के लिए दूसरा कोई खड़ा नहीं होगा.

खुरालगढ़ में समाज समागम में खास चेतावनी

खुरालगढ़ में आयोजित समाज समागम में गढ़ी ने यह कहा. आंखें खुली रखें और देखें कि कौन आपकी आवाज संसद और विधानसभा में उठा सकता है. पंजाब की धरती पर आपका साथ किसका है, यह भी स्पष्ट करना होगा. पिछले एक सदी से हमारे साथ अन्याय चला है. अनपढ़ बुजुर्गों को पीछे रखने का इतिहास है. हमें गंदा पानी पिलाने जैसे अनुभव भी याद रहते हैं. बुजुर्गों को साइकिल से ऊपर नहीं उठने दिया गया. ये सब संकेत हैं कि नेतृत्व कब और कैसे बदला गया.

बीते समय का दर्द और नया साल की तैयारी

100 साल पहले भी बुजुर्गों को महफूज़ नहीं समझा गया. वे अनपढ़ रखा गए और गलत फैसलों से आगे नहीं बढ़ सके. यदि कोई उभरा भी, तो उसे दबाकर मजबूत नेता के सामने खड़ा कर दिया गया. अब आपको तय करना होगा कि पंजाब की धरती पर नेतृत्व कौन करेगा. नए साल में दलित और पिछड़े वर्गों पर होने वाले अन्याय को रोका जाना चाहिए. यह समय है कि कौम की एकजुट फोर्स खड़ी की जाए. मधुमक्खियों की तरह छत्ते में रहते हुए रक्षा और भूमिका तय करनी होगी. आपकी आवाज किससे उठेगी, यह स्पष्ट करना होगा.

आगे की राह: नेतृत्व, आवाज और संवाद

नए साल में पंजाब की राजनीति में स्पष्ट नेतृत्व की जरूरत है. आपको यह तय करना होगा कि विधानसभा और लोकसभा में आवाज कौन उठाएगा. इस सफर के लिए एक मजबूत समुदाय आधारित संकल्प बनाना होगा. साथ ही, यह भी देखना होगा कि किन मंचों से सतत संवाद संभव होगा. अधिक जानकारी के लिए देखें: PIB और India.gov.in. इन स्रोतों से आप देख सकेंगे कि सरकारी पन्नों पर ऐसी भूमिकाओं का क्या तर्क होता है. साथ ही, दलित-आधारित राजनीति पर जागरूकता बढ़ाने के लिए यह लिंक उपयोगी रहेगा.

Related: जालंधर ED: डंकी रूट में 5.9 किलो सोना, 4.68 करोड़