झटका मीट रोक पर SGPC का आरोप: AAP कर रही ब्राह्मणीकरण

पवित्र शहरों पर पाबंदियों का समकालीन संदर्भ

पंजाब सरकार ने पवित्र शहरों में पाबंदियां लगा दी हैं. विरोध तेज हो गया है. SGPC ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. SGPC की महिला सदस्य किरनजोत कौर ने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार सिखों का ब्राह्मणिकरण कर रही है. उन्होंने कहा, झटका मीट हमारा हक है. अकाली दल ने भी इस मुद्दे पर बाकायदा सम्मेलन किया. सरकार पवित्र शहर के नाम पर इन परंपराओं को दबा रही है. हलाल मीट और तंबाकू सिख धर्म में वर्जित हैं, पर बहस जारी है. पंजाब सरकार ने हाल ही में श्री आनंदपुर साहिब, तलवंडी साबो और अमृतसर को पवित्र शहर घोषित किया.

घोषणा और प्रभावी कदम

इन शहरों में अब शराब, मांस और तंबाकू की बिक्री पर रोक लग जाएगी. यानी इन शहरों में इन वस्तुओं की उपलब्धता कम हो जाएगी. CM भगवंत मान ने विधानसभा में यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि पुरानी वॉल्ड सिटी भी पवित्र शहर दर्जे से जुड़ी है. तीनों तख्तों वाले शहरों को यह दर्जा दिया गया, लाखों भक्तों की मांग थी. नशा, मीट, शराब और तंबाकू पर पाबंदियां कठोर तरीके से लागू होंगी. नए नियम कैसे अमल में आएंगे, यह प्रशासन बताएगा. सीएम ने विधानसभा सेशन में कहा था कि यह कदम करोड़ों चाहने वालों की इच्छा है. गृह विभाग और पुलिस भी निगरानी बढ़ाएंगे.

SGPC और अकाली दल की प्रतिक्रिया

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इस योजना पर तीखी प्रतिक्रिया दी. SGPC की महिला सदस्य किरनजोत कौर ने कहा कि यह कदम सिखों के ब्राह्मणिकरण की कोशिश है. उन्होंने यह भी कहा कि झटका मीट हमारा हक है. किरनजोत कौर ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पोस्ट भी डाली. केंद्रीय दलों के समर्थक इस पर विरोध दर्ज कर रहे हैं. अकाली दल ने भी जवाबी आक्रोश दिखाने के लिए झटका सम्मेलन का आयोजन किया. सरकार अब इन शहरों में कानून के साथ सामाजिक मानदंडों की भी परीक्षा कर रही है.

अगला कदम और राजनीतिक दृष्टिकोण

यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रहा. लोगों की उम्मीद है कि संतुलित निर्णय से धार्मिक प्रथाएं और आधुनिक नियम एक साथ संभव होंगे. सरकार भरोसा दे रही है कि पूजा स्थलों के अलावा जनजीवन पर असर कम होगा. इन शहरों के आर्थिक प्रभाव और धार्मिक पर्यटन पर भी निगरानी होगी. पवित्र शहर की नीति पर अगले अपडेट के लिए खबरें सामने आती रहेंगी. ऊपर से देखें तो यह फैसला सामाजिक नियंत्रण बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की चुनौती है.

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