धर्मशाला, 03 फ़रवरी । कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने केंद्र सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र द्वारा अपनाई जा रही नीतियां संघीय ढांचे की भावना के विपरीत हैं और इससे विशेष रूप से पहाड़ी व संसाधन-संरक्षण करने वाले राज्यों को आर्थिक संकट की ओर धकेला जा रहा है। मंगलवार को धर्मशाला में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि वर्ष 1952 से भारत में वित्त आयोग की व्यवस्था लागू है, जो भारतीय संविधान के अंतर्गत गठित होती है। इसका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर उन्हें न्यायसंगत सहायता प्रदान करना रहा है। हर पांच वर्ष में गठित होने वाला यह आयोग राज्यों में जाकर उनके खर्च, आय के स्रोतों और विशेष परिस्थितियों का अध्ययन करता था।
कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय हित में ग्रीन फेलिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन को तो लाभ मिला, लेकिन राज्य की एक बड़ी आय समाप्त हो गई। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा इस राजस्व हानि की भरपाई के लिए पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जंगलों का संरक्षण पूरे देश के हित में है, लेकिन उसका आर्थिक भार केवल हिमाचल जैसे राज्यों पर डालना अन्यायपूर्ण है।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं हैं, उत्पादन सीमित है और जनसंख्या कम होने के कारण जीएसटी तथा अन्य करों में राज्य का हिस्सा भी कम बनता है। पर्यटन से होने वाली आय भी मौसमी है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण मैदानी राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक मंहगा पड़ता है। एक किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए कई किलोमीटर का घुमावदार मार्ग बनाना पड़ता है, जिससे लागत अत्यधिक बढ़ जाती है।