इस मौके पर कुलपति प्रो. बंसल ने कहा कि हमें भारत को भारत की दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। जब तक हम भारत को भारतीय दृष्टिकोण से जानेंगे नहीं तब तक हमारी चिंतन धारा श्रेष्ठ नहीं हो सकती, इसलिए भारत, भारती, भारतवर्ष, भाषा और भूषा में आत्मसात करने की आवश्यकता है। हमारे लिए कौटिल्य का अर्थशास्त्र जीवन का वह सार है जो हमें सामाजिकी, आर्थिकी और राजनीति के सैद्धांतिक पक्ष को समक्ष रखती है।
कुलपति ने कहा कि आज हम खुली आंख से सपना देख रहे हैं, जिस सपने को मैंने एक वर्ष पहले देखा था जो आज मूर्त रूप रूप में आया है।
उक्त कार्यक्रम के शुभारंभ के बाद एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने केंद्र के शुभारंभ को लेकर कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल के मार्गदर्शन पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आने वाले समय में यह केंद्र सुदृढ़ होगा। वहीं इसके बाद अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार और कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने अपने विचार रखे।