खेजड़ी आंदोलन, गाली प्रकरण और भील प्रदेश की मांग से विधानसभा में हंगामा

जयपुर, 04 फरवरी । राजस्थान विधानसभा में बुधवार को शून्यकाल और राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान कई मुद्दों को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। खेजड़ी संरक्षण आंदोलन, सदन में अमर्यादित भाषा के प्रयोग और आदिवासी मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

शून्यकाल में पर्ची के माध्यम से कांग्रेस विधायक डूंगर राम गेदर ने खेजड़ी कटाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाओ, खेजड़ी बचाओ समिति के नेतृत्व में बिश्नोई समाज पिछले दो वर्षों से बीकानेर में आंदोलन कर रहा है, इसके बावजूद खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई जारी है। खेजड़ी राज्य वृक्ष है, इसे बचाने के लिए सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। गेदर ने आरोप लगाया कि सरकार को आंदोलन की जानकारी होने के बावजूद आंदोलनकारियों से कोई संवाद नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि तीसरे दिन भी 29 संत और 339 पुरुष अन्न-जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे हैं, जबकि तीन धरनार्थियों की तबीयत खराब हो चुकी है, फिर भी सरकार का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा।

राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल द्वारा अमर्यादित शब्द के प्रयोग पर विवाद खड़ा हो गया। धारीवाल ने कहा कि यदि युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य नहीं बनाया गया तो युवा आबादी चुनौती बन जाएगी। इस पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने तंज कसते हुए कहा कि देश में एक युवक को छोड़कर सभी को रोजगार मिल गया। जवाब में धारीवाल की टिप्पणी के दौरान अमर्यादित शब्द निकल गया। इसके बाद गर्ग ने आरोप लगाया कि धारीवाल की यह आदत बन चुकी है और उनके शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। सभापति ने अमर्यादित शब्द को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया ने टीएडी मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि समन्वयकों को बिना नोटिस हटाया गया और कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें वापस नहीं रखा गया। उन्होंने टीएसपी क्षेत्र में जनरल वर्ग के लोगों की नियुक्ति, रिश्तेदारों को लाभ देने, शिक्षकों के भुगतान में देरी और मां बाड़ी केंद्रों में घटिया पोषाहार वितरण का आरोप लगाया। इस पर टीएडी मंत्री ने समिति बनाकर जांच कराने की बात कही।

इसी बहस में चौरासी से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) विधायक अनिल कटारा ने आदिवासियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भील प्रदेश की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के जंगल उजाड़े जा रहे हैं, जमीन छीनी जा रही है और आरक्षण के अनुरूप भर्तियां नहीं हो रहीं। यदि स्थिति नहीं बदली तो भील प्रदेश की मांग को सड़क से सदन तक मजबूती से उठाया जाएगा।

विधानसभा की कार्यवाही देर शाम गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। गुरुवार को प्रश्नकाल नहीं होगा और शून्यकाल से कार्यवाही शुरू होगी। राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का जवाब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोपहर बाद देंगे, जबकि इससे पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अपनी बात रखेंगे।