लुधियाना, पंजाब: लुधियाना नगर निगम (MC Ludhiana) के प्रस्तावित विस्तार को लेकर बड़ा फैसला फिलहाल टल गया है। नगर निगम की अहम बैठक में यह मुद्दा एजेंडे में शामिल था, लेकिन मेयर ने इसे आगे बढ़ाने से रोक दिया। इस फैसले के बाद शहर की राजनीति से लेकर प्रशासनिक हलकों तक चर्चा तेज हो गई है।
क्या था निगम विस्तार प्रस्ताव
नगर निगम विस्तार प्रस्ताव के तहत लुधियाना शहर की सीमाओं में आसपास के गांवों और तेजी से विकसित हो रहे रिहायशी व औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल करने की योजना थी। इससे निगम का क्षेत्रफल बढ़ता और नए इलाकों में सीवरेज, सड़क, स्ट्रीट लाइट, कूड़ा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाएं मुहैया कराई जा सकती थीं।
मेयर ने प्रस्ताव क्यों रोका
मेयर ने बैठक में स्पष्ट किया कि निगम विस्तार से पहले वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं का पूरी तरह आकलन जरूरी है। मेयर के अनुसार, बिना ठोस बजट योजना और संसाधनों के विस्तार करने से निगम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। साथ ही, प्रस्तावित इलाकों के ग्रामीण प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से सहमति लेना भी जरूरी बताया गया।
किन बिंदुओं पर जताई गई आपत्ति
सूत्रों के मुताबिक, कुछ पार्षदों ने यह भी सवाल उठाया कि विस्तार के बाद सफाई, जल आपूर्ति और ट्रैफिक जैसी मौजूदा समस्याएं और बढ़ सकती हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों के लोग निगम टैक्स और भवन कर बढ़ने को लेकर आशंकित हैं।
आगे क्या होगा
मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पहले डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाए, जिसमें खर्च, संभावित राजस्व, कर्मचारियों की जरूरत और बुनियादी ढांचे की स्थिति का स्पष्ट ब्यौरा हो। इसके बाद ही प्रस्ताव को दोबारा सदन में लाया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में हलचल
विपक्षी पार्षदों ने प्रस्ताव रोकने को राजनीतिक फैसला बताया है, जबकि सत्तापक्ष इसे शहर के हित में लिया गया “सोच-समझकर कदम” बता रहा है। माना जा रहा है कि निगम विस्तार का मुद्दा आने वाले समय में लुधियाना की सियासत में बड़ा विषय बन सकता है।