घटना का संक्षेप
पंजाब के लुधियाना में एक जटिल बलात्कार मामले ने नया मोड़ लिया है. आरोपी जुर्म की गिरफ्त में है और वह लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद है. पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने सबूत जुटाने के लिए आरोपी का एक फर्जी अकाउंट बनाया. उसने इंस्टाग्राम पर आरोपी की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ पोस्ट कीं. पीड़िता ने इसे केवल साक्ष्य जुटाने के लिए किया था, यह उसे सही ठहराने की कोशिश बताती है. जिला अटॉर्नी ने इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध माना है. साइबर क्राइम लुधियाणा देहाती इकाई ने इस मामले में पीड़िता के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह शिकायत 3 जुलाई को दी गई थी.
घटना की टाइमलाइन और धाराएं
3 जुलाई को शिकायत दर्ज होने के बाद हरमनप्रीत सिंह के बयान लिए गए. इसके बाद 12 अगस्त को IPC की धारा 376 और 506 के तहत उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई. पुलिस के अनुसार आरोपी ने बलात्कार किया और शादी का झांसा भी दिया था. आरोपी लुधियाना सेंट्रल जेल में निरुद्ध है. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता ने फर्जी फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए थे. यह संदिग्ध गतिविधियाँ पुलिस की निगरानी में हैं और उनकी पुष्टि की जा रही है. दोनों पक्षों के दावे पर जांच आगे बढ़ रही है.
जाँच और डेटा खंगालना
जांच के क्रम में पुलिस ने उन मोबाइल नंबरों को ट्रैक किया, जिनके जरिये फर्जी अकाउंट चल रहे थे. प्रमुख डेटा स्रोतों से खातों के संचालक-पते का पता लगाने की कोशिश की गई. खातों से जुड़े साक्ष्यों को संचित किया गया ताकि सही धाराओं में कार्रवाई संभव हो सके. शिकायतकर्ता से पूछताछ के लिए भी संपर्क किया गया ताकि कहानी के सभी पहलुओं का स्पष्ट सत्यापन हो सके. पुलिस ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने आरोपित के विरुद्ध तथ्य दर्ज करवाने के लिए कुछ समय पहले अपनी धारणा बदली थी. इसके आधार पर IT Act के प्रावधान लागू कर FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया.
कानूनी दिशा-निर्देश और आगे की राह
IT Act की धारा 66C Identity theft से जुड़ी है और इसमें अपराध माना जाता है. यह केस cyber law के दायरे में आता है और सोशल मीडिया पर गलत रिकॉर्ड बनाकर सूचना-गोपनीयता का उल्लंघन करने से जुड़ा है. कानून विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे मामलों में साक्ष्यों की पुष्टि महत्त्वपूर्ण है ताकि गलत आरोप से बचा जा सके. आगे अदालत में सुनवाई चलेगी और उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी. अधिक जानकारी के लिए देखें: राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल और Information Technology Act, 2000.
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