सिरसा में मांगों को लेकर किसान संगठनों ने दिया धरना

किसानों की मांग है कि अत्यधिक बारिश, जलभराव/बाढ़ से बर्बाद हुई खरीफ -2025 की फसलों का मुआवजा, बोनी जीरी और वायरस से संक्रमित फसल का भी मुआवजा दिया जाए। साथ ही बाढ़ से हुए आर्थिक और मानवीय नुकसान का मुआवजा भी जारी किया जाए। 2023 की बाढ़ से टूटी हुई सडक़ों को पहल के आधार पर बनाया जाए। जिन गावों में जलभराव की समस्या है, उनके लिए विशेष बजट जारी करते हुए पानी की निकासी के स्थाई प्रबंध किए जाएं। इसके साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों/इलाकों में बाढ़ की तबाही से बचाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएं और समयबद्ध ढंग से इन इलाकों में लागू किया जाएं। धान की फसल में हुई किसानों की लूट/बाहर से आने वाले धान की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।

खरीफ फसलों पर किसानों को सरकार द्वारा घोषित एमएसपी भी न मिलने से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को आर्थिक मदद/बोनस आदि दिया जाए। धान की फसल में नमी प्रतिशत को 17 प्रतिशत की बजाय 22 प्रतिशत किया जाए। पिछले समय के प्रदेश के कई जिलों के बारिश, ओलावृष्टि, जलभराव, पाले, आगजनी आदि के लंबित मुआवजे जारी किए जाएं।

किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करवाई जाएं। खाद के साथ जबरन नैनों, जिंक एसल्फर, बीज जैसे अन्य सामग्री साथ देने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कानून कार्यवाही की जाएं और इसकी जांच के लिए अनुरूनी प्रशासनिक टीमों का गठन किया जाए। बिजली के लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जल्द जारी किए जाएं। बिजली बिल 2025 और स्मार्ट मीटर योजना को रद्द किया जाएं। गन्ने का रेट बढ़ाया जाए और बकाया पेमेंट जारी की जाए। सहकारी समितियों में नए एमसीएल बनाए जाएं। सभी किसानों और खेत मजदूरों को पेंशन दो।

बढ़ते नशे पर रोक लगाई जाए। कालांवाली क्षेत्र के गांवों मे हाल ही में हुई ओलावृष्टि व आंधी तूफान के कारण बिजली आपूर्ति में आई बाधा को ठीक किया जाए और इससे खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाकर मुआवजा दिया जाए। सरकार द्वारा किसानों को पराली प्रबंधन व धान की सीधी बिजाई की सहायता राशि जो सरकार द्वारा घोषित की गई है, उसे किसानों के खातों में भेजी जाए।