सेमी कंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए, SCL मोहाली के आधुनिकीकरण और विस्तार पर 4,500 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया कि Mohali स्थित Semiconductor Lab (SCL) का निजीकरण नहीं किया जाएगा और इसे सार्वजनिक नियंत्रण में ही रखा जाएगा। इस तरह की पहल से हमारी घरेलूchip निर्माण क्षमता में तेजी आएगी। इस दौरे के अवसर पर केंद्रीय IT मंत्री Ashwini Vaishnaw और केंद्रीय राज्यमंत्री Ravneet Singh Bittu ने SCL के प्रगति कार्य का गहन अवलोकन किया और कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस संसाधनों की उपलब्धता से स्थानीय प्रतिभा को 글로벌 मानक के अनुरूप अवसर मिलेंगे।
कार्यक्रम के क्रम में गैलरी और ट्रेनिंग ब्लॉक का उद्घाटन किया गया, जिससे SCL के छात्रों को वास्तविक FAB (फैब्रिकेशन) अनुभव प्राप्त होगा। इसके साथ ही SPG (Semiconductor Process Gallery) और क्लीन रूम लैब जैसी सुविधाओं से पुराने जनरेशन के फैब्रिकेशन टूल्स के साथ मिलकर शिक्षार्थियों को उन्नत प्रैक्टिकल ट्रेनिंग मिलेगी। ATB ( अभियूथनम ट्रेनिंग ब्लॉक) में ऑनलाइन-ऑफलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल्स और फायर-सेफ्टी के हैंड्स-ऑन अनुभव शामिल हैं। इससे 28 चिप्स, जिन्हें 17 संस्थानों के विद्यार्थियों ने C2S (Chips to Start-up) कार्यक्रम के तहत EDA टूल्स की सहायता से डिज़ाइन किया था, SCL को सौंपे गए हैं और अब तक कुल 56 छात्र-डिज़ाइन चिप बनकर तैयार हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCL के भविष्य के लिए स्पष्ट रोडमैप दिया है, जिसमें इसे अत्याधुनिक तकनीक के साथ उन्नत किया जाना और उत्पादन क्षमता को 100 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य शामिल है। सरकार के इस कदम से छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को वास्तविक सिलिकॉन में रूपांतरण के लिए फैब्रिकेशन सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। इस विस्तारीकरण के लिए पंजाब सरकार से 25 एकड़ ज़मीन लेने का प्रस्ताव भी रखा गया है ताकि सुविधाओं का दायरा बढ़ सके।
भारत में EDA टूल्स का विश्वस्तरीय इकोसिस्टम बनते देखना एक सकारात्मक संकेत है: लगभग 300 विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी सरकार समर्थित EDA टूल्स के जरिये चिप डिज़ाइन कर रहे हैं और यह दुनिया के कुछ चुने हुए देशों में से एक है जहां ऐसी कवायद बड़े पैमाने पर चल रही है। SCL भविष्य में प्रतिभा विकास, नवाचार और स्टार्टअप के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा, यह स्पष्ट नीति-निर्णय है। रणनीतिक क्षेत्रों के आत्मनिर्भरता के लिए CDAC, DRDO और अन्य संस्थानों का एक मजबूत कंसोर्टियम भी बन रहा है, ताकि स्वदेशी चिप डिज़ाइन, उत्पाद विकास और मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता और निर्यात-योग्यता बढ़े। अधिक जानकारी के लिए देखिए: Chips to Start-up (C2S) program और CDAC.
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