पंजाब के मोहाली जिले में पुलिस ने 9.88 करोड़ रुपए की नकली मुद्रा बरामद कर एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. मोहाली के SSP हरमनदीप सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि मामले में हरियाणा के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है; वे एक स्कार्पियो कार में नकली नोट लेकर आने-जाने की योजना बनाते समय पकड़े गए. बरामद गड्डी में असली नोटों के ऊपर और नीचे नकली नोट डालकर बीच में रखे गए थे ताकि पहचानना मुश्किल हो सके. इस मामले की निगरानी अब डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम कर रही है, जिसे पुलिस विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई के लिए स्थापित किया गया है. पुलिस ने संकेत दिया है कि यह गिरोह पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच चलने वाली फर्जी नोटि-घोटालों के नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर नकली मुद्रा के कारोबार की बारीकी समझ में आती है.
जांच के दौरान पुलिस ने जिस नकली मुद्रा को बरामद किया, उसकी संरचना और वजनदार ढंग से बाँटी गई गड्डियों ने चौंका दिया. जाली नोटों के साथ 1,000 रुपए के 80 बंडल, 500 रुपए के 60 बंडल और 2,000 रुपए के 439 बंडल मिले हैं, जिसकी कुल कीमत लगभग 9.88 करोड़ रुपए बताई जा रही है. नोटों के भीतर असली-नकली नोटों की परतें इस प्रकार रखी गई थीं कि सफाई से पहचानना मुश्किल हो। आरोपी समूह ने बिक्री के बदले नकली नोटों को असली नोटों से मिश्रित कर रखने की आदत को अपनाया था ताकि पुलिस को भ्रम हो सके। यह स्पष्ट करता है कि गिरोह के फेक करेंसी के साथ-साथ वास्तविक नोटों का मिश्रण एक सामान्य रणनीति रहा है, ताकि वित्तीय लेन-देन में असमंजस बना रहे और नकली मुद्रा के बिखराव को रोकना मुश्किल हो जाए.
इस नेटवर्क की व्यापकता सामने आने के साथ ही पंजाब पुलिस के अनुसार यह गिरोह पंजाबी-हरियाणवी-राजस्थानी ठगी के कई केसों से जुड़ा हुआ है. मोहाली के फेज-1 थाना में पहले से 7 करोड़ रुपए के एक ठगी के मामले का रिकॉर्ड पाया गया है, जबकि Derabassi थाना क्षेत्र में इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 318(4), 178, 179, 180 और 182 के तहत मामला दर्ज है. अब तक की पूछताछ में यह पाया गया कि गिरोह के सदस्य विभिन्न जिलों में नोट-पट्टिकरण और नकली मुद्रा का निर्माण कर उससे जुड़े नेटवर्क के जरिये बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े को अंजाम देते रहे हैं. पुलिस इस मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है और उसकी दिशा में नई कड़ियाँ जुड़ती जा रही हैं, ताकि नकली मुद्रा का यह खेल पूरी तरह खत्म हो सके और अपराधियों के वित्तीय स्रोत उजागर हों.
नोटबंदी के बाद की घटनाओं के संदर्भ में, मोहाली पुलिस ने 2016 में भी नोटबंदी के समय 42 लाख रुपए की नकली मुद्रा को एक लग्जरी ऑडी Q7 SUV से बरामद किया था; उस वक्त कार में तीन लोग थे, जिनमें एक इंजीनियर भी शामिल था. तलाशी के दौरान 2 हजार के 2100 नोट भी बरामद हुए थे. इस प्रकार के पुराने और नए नोटों के मिश्रण से संकेत मिलता है कि नकली मुद्रा का जाल किस तरह से व्यापक नेटवर्क से जुड़कर संचालित हो रहा है. इस सिलसिले में देशभर के शीर्ष प्रहरी तंत्र सक्रिय रूप से जुड़े हैं और आगे अधिक गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं. नोटबंदी के प्रभाव और नकली मुद्रा के नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें: BBC: India’s demonetisation explained.