सोनीपत: प्राकृतिक खेती कम खर्चीली व आय बढ़ाने का माध्यम: राज्यपाल देवव्रत

तथ्यों के साथ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्राकृतिक खेती को कम खर्चीली और आय बढ़ाने का माध्यम बताया। राज्यपाल

आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती प्रकृति के नियमों पर आधारित, कम खर्चीली

और दीर्घकालिक रूप से लाभकारी पद्धति है। इसका मूल आधार देसी गाय है। देसी गाय के गोबर

और गोमूत्र में मौजूद करोड़ों लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु मिट्टी को जीवंत बनाते हैं। उन्होंने

जीवामृत बनाने और उपयोग की विधि बताते हुए कहा कि देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़,

दाल का बेसन और खेत की मिट्टी से तैयार जीवामृत डालने से सूक्ष्म जीवाणु तेजी से बढ़ते

हैं।

इससे केंचुए बढ़ते हैं, मिट्टी की जल धारण क्षमता सुधरती है और भूमि दोबारा उपजाऊ

बनती है। उन्होंने

कहा कि प्राकृतिक खेती से मित्र कीट और सूक्ष्म जीवाणु लौटते हैं, वर्षा जल धरती में

समाता है और भूजल संरक्षण होता है। यह पद्धति किसान की लागत घटाकर आय बढ़ाती है तथा

पर्यावरण और जल संरक्षण में सहायक है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक

खेती छोड़कर कम से कम अपनी जमीन के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें। केंद्र

सरकार ने प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मिशन के रूप में अपनाया है और हरियाणा सरकार

द्वारा किसानों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल

बड़ौली और विधायक पवन खरखौदा ने भी प्राकृतिक खेती को किसान, समाज और आने वाली पीढ़ियों

के लिए आवश्यक बताया। जिन्होंने स्वयं खेतों में मेहनत कर मिट्टी की खुशबू और किसान

के पसीने की महक को महसूस किया है। धरती माता को किसानों के लिए धर्म का तीर्थ बताते

हुए कहा कि यही हमारी सभ्यता, संस्कृति और त्याग का सबसे बड़ा आधार है।

इस मौके पर

जिला प्रभारी सतीश नांदल, भाजपा जिलाध्यक्ष सोनीपत अशोक भारद्वाज, गोहाना जिलाध्यक्ष

बिजेन्द्र मलिक, महामंत्री नीरज ठरू व तरूण देवीदास, कैप्टन योगेश बैरागी, राजकुमार

कटारिया, सोनिया अग्रवाल, विधायक के पिताजी आजाद भौरिया, अनाज मण्डी प्रधान नरेश दहिया,

दोणाचार्य अवार्डी ओमप्रकाश दहिया, स्वामी सरदानंद, सरपंच आशीष दहिया के साथ साथ क्षेत्र

के हजारों किसान मौजूद रहे।