पंजाब में अफीम ठेकों पर बवाल: किसानों की मांग

पंजाब में नशा संकट: बीकेयू ने खसखस की नियंत्रित खेती की मांग की

भारतीय किसान यूनियन ने पंजाब में नशे के बढ़ते संकट पर चिंता जताई है। यूनियन ने तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने खसखस की नियंत्रित खेती को मंजूरी देने का आग्रह किया है। साथ ही अफीम बिक्री के लिए सरकारी ठेके खोलने को कहा है।

सिंथेटिक ड्रग्स से युवा पीढ़ी को खतरा

यूनियन प्रमुख हरमीत सिंह कादियां ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने सिंथेटिक नशों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। सामाजिक ढांचा गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए साहसिक फैसले जरूरी हैं।

नियंत्रित व्यवस्था से मिलेंगे कई फायदे

इस प्रस्ताव से कई लाभ की उम्मीद है। गैरकानूनी तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगेगा। खतरनाक नशों जैसे चिट्टा का प्रसार रुकेगा। सरकार और किसानों को नया राजस्व स्रोत मिलेगा। पंजाब की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। ग्रामीण रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

किसान एकजुट होकर उठा रहे हैं आवाज

यूनियन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों की मुख्य समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है। फसलों के लाभकारी मूल्य की मांग है। कृषि कर्ज और बढ़ती लागत बड़ी चुनौती है। किसान अब पूरी तरह से एकजुट हो गए हैं। वे अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़े हैं।

अंतरराष्ट्रीय समझौते और कृषि संकट

यूनियन ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आलोचना की। ऐसे समझौते कृषि व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। नशा और कृषि संकट गंभीर मुद्दे हैं। यदि जल्द नीतिगत फैसले नहीं हुए तो आंदोलन होगा। पूरे राज्य में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन संभव है।

पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या पर अधिक जानकारी के लिए आप स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट देख सकते हैं। कृषि नीतियों से संबंधित विवरण कृषि मंत्रालय के पोर्टल पर उपलब्ध है।
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