कानपुर, 30 मार्च । ग्रामीण विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवकों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और नवाचार बेहद आवश्यक है। उन्नत भारत अभियान के माध्यम से गांवों में शिक्षा, कौशल और जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। आईआईटी कानपुर इस दिशा में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है और संस्थानों को जमीनी स्तर पर काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। गांवों से जुड़ाव बढ़ाने से छात्रों और स्थानीय समुदाय दोनों को लाभ मिल रहा है। यह बातें सोमवार को उन्नत भारत अभियान के समन्वयक प्रो. संदीप सांगल ने कहीं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत सहभागी संस्थानों के लिए परिचयात्मक एवं विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया गया। एक दिवसीय इस कार्यशाला में 17 से अधिक जिलों के 40 से ज्यादा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें शैक्षणिक संस्थान, विकास सहयोगी, वित्तपोषण एजेंसियां और स्वयंसेवक शामिल रहे।
कार्यक्रम में प्रो. संदीप सांगल ने आईआईटी कानपुर में यूबीए की यात्रा साझा करते हुए गांव स्तर पर शिक्षा से जुड़ने पर जोर दिया। वहीं सह-समन्वयक प्रो. सुधांशु एस. सिंह ने विभिन्न पहलों की जानकारी देते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान में तकनीक और प्रशिक्षण की भूमिका बताई।
अनुसंधान एवं विकास के सह-अधिष्ठाता प्रो. राजा अंगमुथु ने छात्रों की भागीदारी से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की बात कही। राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वीरेंद्र के. विजय ने कहा कि छात्र स्वयंसेवक स्थानीय संस्कृति को समझते हुए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे पलायन को रोका जा सकता है।
नाबार्ड के डीडीएम राहुल यादव ने विभिन्न ग्रामीण पहलों में सहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया, जबकि प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के ओम प्रकाश ने कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी।
सत्र में विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने कार्यों की प्रस्तुति दी, जिनमें स्वास्थ्य शिविर, विधिक जागरूकता और सामुदायिक पहल शामिल रहीं। इसके अलावा पॉटरी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कारीगरों और छात्रों ने भाग लिया।