शिमला, 13 जनवरी । हिमाचल प्रदेश में सड़क ढांचे को मजबूत और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। राज्य सरकार ने सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए दो नई आधुनिक तकनीकों पर आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इन तकनीकों का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में बार-बार क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों की समस्या का स्थायी समाधान खोजना है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसी तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है, जिनसे कम समय में मरम्मत, लागत में कमी और सड़कों की लंबी उम्र सुनिश्चित हो सके। खासतौर पर बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में इन तकनीकों को आजमाया जा रहा है, जहां पारंपरिक तरीकों से बनाई गई सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं।
पहली तकनीक में विशेष प्रकार के पॉलिमर और आधुनिक बाइंडिंग मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सड़क की ऊपरी सतह ज्यादा मजबूत बनेगी। वहीं दूसरी तकनीक में रीसाइक्लिंग आधारित सड़क मरम्मत प्रणाली अपनाई जा रही है, जिससे पुरानी सड़क सामग्री का दोबारा उपयोग हो सकेगा और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि यदि ये पायलट प्रोजेक्ट सफल रहते हैं, तो इन्हें पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू किया जाएगा। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन, सेब उत्पादकों और ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना की नियमित निगरानी की जा रही है और तकनीकी विशेषज्ञों से फीडबैक भी लिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर हिमाचल की सड़कों को अधिक टिकाऊ और मौसम प्रतिरोधी बनाया जाएगा, जिससे भविष्य में मरम्मत पर होने वाला खर्च भी कम होगा।