किलोमीटर स्कीम पर पंजाब में बसें ठप—577 रूट प्रभावित

पंजाब में आज स्थिति कुछ हद तक शांत पड़ते दिख रही है, पर यह स्थगन अस्थायी माना जा रहा है। पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के कर्मचारियों द्वारा बुलाए गए आज की हड़ताल फिलहाल किस्मत भर टाल दी गई है, ताकि बातचीत का फोरम खुला रहे। पंजाब रोडवेज डिपो जालंधर वन के प्रमुख चनन सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ चल रही वार्ता के परिणाम पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी; अगर सरकार ने Kilometer-based (KM) स्कीम के तहत टेंडर रद्द नहीं किया तो बसें एक बार फिर से बंद होने की चेतावनी दी जाएगी। यह सब तब हो रहा है जब दोपहर 12 बजे पूरे पंजाब में चक्का-जाम की तैयारी के संकेत दिए गए थे। कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन KM स्कीम के विरोध में दबाव बना रही है, उनका कहना है कि निजी बसों के टेंडर खोलने से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा और वे कच्चे मजदूरों को पक्का करने की भी मांग कर रहे हैं।

PRTC की स्थितियों के संदर्भ में देखा जाए तो पंजाब रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) इन दिनों 577 रूटों पर सेवाएं देता है और प्रतिदिन लगभग 3.55 लाख किलोमीटर का सफर तय करता है। निगम में कुल 3,065 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 1,310 नियमित कर्मी और 1,755 कॉन्ट्रैक्ट (आउटसोर्स) कर्मचारी शामिल हैं। अगर हड़ताल की चेतावनी सच साबित होती है, तो यात्रियों के लिए आवागमन भारी कठिनाइयों में पड़ सकता है क्योंकि इन बसों पर निर्भर लाखों लोग रोजमर्रा की आवाजाही करते हैं।

पिछले कुछ सप्ताह से सरकार KM स्कीम के टेंडर खोलने की योजना पर एक ही बात दोहराती आ रही है, मगर वह हर बार टाल दी गई है। राखी के पहले भी टेंडर खोलने की तैयारी की गई, जैसे ही दोपहर 12 बजा, PRTC की बसें पलटनकर रुक गईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद सरकार ने टेंडर खोलने की तारीख आगे बढ़ाने का निर्देश दे दिया। इसके पीछे तरनतारन विधानसभा उपचुनाव के चलते राजनीतिक स्थिति भी एक कारण मानी जा रही थी। 23 अक्टूबर को टेंडर खोलने की तीसरी कोशिश की बाते थीं, लेकिन माहौल बदला और बसें फिर से थम गईं। अब एक बार फिर मंत्रालय के भीतर टेंडर खुलने की खबरें चल रही हैं, जिससे यूनियन के साथ सरकार के टकराव की संभावना बनी हुई है।

यह घटनाक्रम पंजाब के सार्वजनिक परिवहन के लिए अहम संकेत है। कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन की मुख्य मांग KM स्कीम को वापस लेने, निजी टेंडरों के निर्गमन पर रोक लगाने और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की है। सरकार और यूनियन के बीच समझौते के बिना यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, खासकर उन বাসों पर जो 577 रूटों पर संचालित होती हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि आधिकारिक घोषणाओं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट विभाग के बयान पर ही भरोसा रखें, क्योंकि स्थिति समय के साथ बदलती रहती है। अधिक जानकारी के लिए देखें Punjab Road Transport Corporation (PRTC) और Punjab Transport Department.

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