आज जुड़ें: पंजाब में कांग्रेस का मनरेगा विरोध, राजा खरड़

कांग्रेस का पंजाब-स्तर विरोध

आज पूरे पंजाब में मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन के विरोध में जिला-स्तर पर प्रदर्शन होंगे। कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता इसमें शामिल होंगे। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग खरड़ में मौजूद रहकर प्रदर्शन की अगुवाई करेंगे। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार गरीबों के हक़ और रोजगार के अधिकार पर हमला कर रही है। यह कदम मनरेगा के मूल उद्देश्य से समझौता दिखाता है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह नाम बदले के बहाने सरकार पर सवाल उठाने का प्रयास है।

केंद्र-राज्य के आरोप और तर्क

राजा वड़िंग ने कहा कि पहले मनरेगा में केंद्र का हिस्सा 90% था और राज्य का 10%। पर भुगतान इसलिए रुके क्योंकि पंजाब सरकार 10% हिस्सा नहीं दे पाती थी। अब कई कामों में कटौती हो चुकी है, जिससे योजनाओं की गति थमी है। यह सड़कों की सफाई, सिंचाई और ग्रामीण विकास के कामों पर असर डाल रहा है। पंजाब में मनरेगा मजदूरी 346 रुपये प्रतिदिन है, जबकि 500 का वादा किया गया था। पहले 100 दिन की गारंटी कही गई थी, अब 125 दिन बताए जाते हैं; पर हकीकत उलट है। लुधियाना में 1,21,123 पंजीकृत मजदूरों में से केवल 51,488 को काम मिला; 12 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला।

मजदूरी और कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति

कांग्रेस के मुताबिक स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह केंद्र-राज्य दोनों सरकारों की जिम्मेदारी बनती है कि रोजगार और राहत के अधिकार सुरक्षित रह सकें। यह तथ्य संकेत करता है कि ग्रामीण विकास और सड़कों की मरम्मत जैसे क्षेत्रों में मनरेगा के प्रभाव पर असर पड़ रहा है। मजदूरों को समय पर काम नहीं मिल रहा, वेतन देरी से मिल रहा है और योजनाओं की संरचना पुराने लक्ष्य से पीछे छूट रही है। साथ ही, 100 दिन गारंटी के दावे भी जमीन पर नहीं दिख रहे।

प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस यह संदेश दे रही है कि गरीबों के रोजगार के अधिकारों की सुरक्षा के लिए निर्णय-प्रक्रिया में संशय की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह मांग राज्य सरकार और केंद्र से है कि वे मिलकर सही कदम उठाएं और मजदूरों की भागीदारी सुनिश्चित करें। MGNREGA official portal पर योजनाओं का ताजा विवरण देखने लायक है, ताकि वास्तविक स्थिति समझ सके।

सरकारों से जुड़ी और जानकारी के लिए देखें Punjab Government Portal। यह क्रिया-प्रणाली स्पष्ट करे कि रोजगार गारंटी के दायरे में किस तरह के फायदों का वितरण किया जा रहा है और किन कदमों से भुगतान प्रक्रिया सुधारे जा रहे हैं।

लुधियाना का मिसाल और निष्कर्ष

लुधियाना जिले का डेटा इस आंदोलन के दायरे में प्रमुख उदाहरण है। पंजीकृत मजदूरों की कुल संख्या 1,21,123 है, लेकिन काम पाने वालों की संख्या केवल 51,488 तक सीमित रही। इनमें से केवल 12 परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिल पाया। इससे स्पष्ट होता है कि वास्तविक Gurantee और पीएम-गांव के बीच दूरी अब भी काफी बढ़ी है।

केंद्रीय और राज्य सरकारों के लिए यह संकेत साफ है कि मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन से पहले रोजगार की गारंटी और भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। अन्यथा ग्रामीण इलाकों में आर्थिक-सामाजिक असमानता और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। कांग्रेस का मानना है कि रोजगार के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और नाम बदले जैसे प्रतीकात्मक कदमों से काम नहीं चलेगा। यह राजनीतिक आ campaña नहीं, बल्कि गरीब जनता के वास्तविक साहाय्यता के लिए ठोस नीति-आयोजन का सवाल है।

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