पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की है। मोहाली में एक दंपति की गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट ने सवाल उठाए। दंपति के नाबालिग बच्चों को भी थाने ले जाया गया। अदालत ने इस मामले को गंभीर माना है। राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया है। संबंधित पुलिस अधिकारियों की जांच के निर्देश दिए हैं।
जमानती मामले में की गई थी गिरफ्तारी
यह मामला मोहाली के फेज-11 थाने से जुड़ा है। एफआईआर नंबर 150 के तहत मामला दर्ज किया गया। याचिकाकर्ता मोनिका छाबड़ा ने कोर्ट में बताया। 20 नवंबर 2025 को यह केस दर्ज हुआ था। इसमें लगाए गए आरोप जमानती प्रकृति के थे। फिर भी पुलिस ने सुबह घर में घुसकर गिरफ्तारी की। बिना कोई ठोस कारण बताए यह कार्रवाई हुई।
नाबालिग बच्चों को भी ले गई थी पुलिस
पुलिस की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल यह उठा। दंपति के दो छोटे बच्चों को भी थाने ले जाया गया। एक बच्चा डेढ़ साल का था तो दूसरा पांच साल का। ये बच्चे किसी भी आरोप में शामिल नहीं थे। बाद में दंपति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उसी दिन उन्हें जमानत मिल गई। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध बताई गई।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में पुलिस कार्रवाई को असंवैधानिक बताया गया। अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ। अनुच्छेद 21 यानी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की भी अवहेलना हुई। नाबालिग बच्चों के अधिकारों को गंभीर खतरा पैदा हुआ। बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई गई। पुलिस के आचरण पर कानूनी सवाल उठे हैं।
अगली सुनवाई 2026 में, शिकायत का सिलसिला
याचिकाकर्ता ने बताया कि पहले वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। न्याय पाने के लिए यह कदम उठाया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को तय की है। पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर यह मामला अहम बन गया है। भारतीय कानून में गिरफ्तारी के नियमों को समझने के लिए आप गृह मंत्रालय की वेबसाइट देख सकते हैं। नागरिक अधिकारों के बारे में अधिक जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से प्राप्त कर सकते हैं।
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