पंजाब में रोडवेज-पनबस-पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की पांच दिन की हड़ताल
पंजाब में रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स पांच दिनों से हड़ताल पर हैं. यह आंदोलन राज्यभर में फैल गया है और सार्वजनिक परिवहन पर असर नजर आ रहा है. सरकारी बसों का संचालन लगभग ठप हो गया है. राज्य के लगभग 1600 बसें अलग-अलग डिपुओं में खड़ी हैं. यूनियन नेताओं और सरकार के बीच बैठकें चल रही हैं, पर ड्यूटी से वापस लौटने के संकेत नहीं मिल रहे. डिपो के बाहर जमा प्रवासी सेवकों ने समर्थन में banners और slogans लगाए हैं. कई जिलों में महिलाएं निजी बसों में सफर कर रही हैं और किराया भी बढ़ गया है. स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों की आवाजाही बाधित होकर आम जनता को राहत नहीं मिल पा रही. आंदोलन के कारण स्थानीय प्रशासन को विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं. यह स्थिति पंजाब के यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है.
यात्रियों पर असर और प्रदर्शन
हड़ताल से दैनंदिन यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है. खासकर उन लोग के लिए यह समस्या बढ़ी है जो कामकाजी समय पर पहुंचना चाहते हैं. महिलाएं किराये के निजी बसों पर निर्भर हो चुकी हैं. कई जिलों में सीट बुकिंग, समय-पर-समय पहुँच की समस्या बनी हुई है. टंकी और डिपो के बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ी है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे. जनता को असुविधा से बचाने के लिए वैकल्पिक यातायात योजनाओं की जरूरत महसूस हो रही है. निजी बसों पर निर्भरता बढ़ने से किराया अधिक रहने की शिकायत है. कई जगहों पर ट्रांसपोर्टर और यात्रियों के बीच असंगतियाँ दिख रही हैं. मीडिया कवरेज के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन भी स्थिति को समझ रहा है. इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख समाचार पोर्टलों पर टिप्पणियाँ आ रही हैं, देखें The Hindu और Indian Express.
सरकार-यूनियन के बीच बैठक के बाद स्थिति
पार्श्विक वाहन विभाग के मंत्री के साथ सात घंटे चली बैठक में कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी. यूनियन के नेता गुरप्रीत सिंह वड़ैच ने कहा कि कुछ प्रस्ताव लागू नहीं हो रहे. उनका कहना है कि गिरफ्तारी रहे साथियों की रिहाई और केस रद्द होने तक हड़ताल जारी रहेगी. यूनियन ने कहा कि दमन के बजाय बातचीत और कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता. सरकार ने कुछ आश्वासन दिए, पर अब तक उन्हें लागू करने के संकेत नहीं मिले. स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और सुविधा के उपाय पर भी बातचीत जारी है. नागरिक संपत्ति की सुरक्षा और अराजकता से बचाव के लिए निर्देशों का पालन किया जा रहा है. प्रेस व मीडिया से मुलाकात में यूनियन ने सरकार से भरोसा बनाने की मांग की. अगर स्थिति अनुकूल नहीं बदली तो आंदोलन और तेज हो सकता है.
बुढ़लाडा के टंकी पर प्रदर्शन और मांगें
बुढ़लाडा डिपो के तीन मुलाजिम पांच दिन से पानी की टंकी पर बैठे हैं. यूनियन अध्यक्ष राजवीर सिंह उनके साथ हैं. वे पेट्रोल की बोतलें लेकर टंकी पर डटे हैं. उन्होंने कहा कि मांग पूरी हुए बिना हड़ताल खत्म नहीं होगी. सरकार ने गिरफ्तार साथियों की रिहाई और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के पक्के होने का वादा किया था, पर नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ. मीटिंग के बाद रात भी बीत चुकी है, फिर भी रिहाई नहीं हुई. यूनियन ने कहा कि अगर नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है. आंतरिक प्रशासनिक स्तर पर विवाद और प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कदम उठाए जा रहे हैं. अन्य जिलों में भी ऐसी गतिविधियाँ चल रही हैं और बातचीत फिर से शुरू करने की मांग उठ रही है.
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