राणा केपी सिंह का आरोप: दबाव से मतगणना रुकी

मतगणना देरी पर प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर राणा केपी सिंह ने मतगणना में देरी पर प्रशासन पर निशाना साधा। उनके अनुसार कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश मिला है, फिर भी नतीजे रोके जा रहे हैं। ब्लॉक समिति चुनावों में देरी की वजह प्रशासनिक दबाव मानी जा रही है। आनंदपुर ब्लॉक में कांग्रेस ने सात सीटें जीतने का दावा किया है। प्रतापगढ़ ज़ोन में मतगणना चार घंटे पहले पूरी हो चुकी थी, फिर भी नतीजे घोषित नहीं हुए। यह स्थिति मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है और समर्थकों में गहराती नाराज़गी को भी उजागर करती है। राणा केपी सिंह ने कहा कि यदि जनता के फैसले का सम्मान नहीं किया गया, तो कानून-व्यवस्था बाधित हो सकती है। स्थिति को संभालने के लिए एसएसपी गेट पर तैनात हैं और प्रशासनिक ताबड़तोड़ कदमों की चर्चा चल रही है। दलित-आन्दोलन जैसी स्थितियाँ पैदा होने से रोकना जरूरी है, ताकि लोकतंत्र मजबूत बना रहे। यह पूरा मुद्दा जनता के जनादेश के सम्मान से जुड़ा है और कांग्रेस इसे अंत तक लड़ेगी।

जिला परिषद-ब्लॉक चुनावों में दबाव और देरी के दावे

कोटला/उटले ज़ोन की दूसरी जिला परिषद सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। पर चार घंटे से अधिक समय तक नतीजे घोषित नहीं हुए। प्रतापगढ़ जिले की अन्य ज़ोन में मतगणना पहले ही पूरी हो चुकी थी, फिर भी औपचारिक घोषणा में देरी चली। राणा केपी सिंह ने कहा कि यह देरी दबाव के कारण हो रही है और परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। उनके अनुसार विपक्षी निर्दिष्ट सीटों पर भी ऐसा असर देखा गया है। कांग्रेस ने जनता के जनादेश के सम्मान के लिए कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल की चेतावनी दी है। स्थिति पर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है और ज्यादा से ज्यादा नागरिक देख रहे हैं कि परिणाम कब घोषित होंगे। यह सवाल अब प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता का है और उच्च स्तरीय निर्देशों की मांग उठा रहा है। मीडिया के अनुसार इसकी विस्तृत कवरेज स्थानीय न्यूज चैनलों और ऑनलाइन पोर्टलों पर भी मिल रही है।

जनसैलाब और सुरक्षा स्थिति

मौके पर हजारों समर्थक मौजूद थे और व्यापक नाराज़गी देखी गई। घटना के दौर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के लिए एसएसपी गेट के पास तैनात रहे। राणा सिंह के अनुसार जनता का लोकतंत्र के प्रति संवेदनशील रवैया दिखा, और एकतरफा निर्णय से नाराज़गी बढ़ी। कांग्रेस ने कहा कि यह संघर्ष अंत तक जाएगा, और जरूरत पड़ने पर पुनः मतगणना की मांग उठेगी। कानून-व्यवस्था के लिहाज से प्रशासन को कदम एकदम स्पष्ट तरीके से उठाने चाहिए, ताकि स्थिति अब आगे और बिगड़ न पाए। विपक्षी धड़े भी दबाव घटाने के लिए शांतिपूर्ण मार्ग अपनाने की अपील कर रहे हैं। यह मामला न सिर्फ स्थानीय राजनीति, बल्कि राज्य में लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा है। हर कदम पर सत्यापन की मांग और प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर निगरानी बनी रहेगी।