गोद देने की पूरी औपचारिक प्रक्रिया के बाद उसके प्रपत्रों में मां के रूप में उसकी मामी और पिता के रूप में मामा का नाम दर्ज कर लिया गया है। ई-डिस्ट्रिक मैनेजर ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर बच्ची का आधार कार्ड बनवाया। इस तरह बच्ची को जन्म प्रमाण पत्र के साथ जन्मसिद्ध अधिकार, फिर माता-पिता और अब आधार कार्ड के रूप में देश के नागरिक के रूप में पहचान मिल गई है।
उल्लेखनीय है कि शारीरिक रूप से 95 फीसदी दिव्यांग युवती के साथ हुए दुष्कर्म की घटना 19 सितंबर 2024 को प्रकाश में आयी थी। युवती पूछने पर अपनी भाभी को बमुश्किल बता पायी थी कि पड़ोसी अजय कुमार आर्या ने उसके साथ तीन-चार माह पूर्व घर में जबरन शारीरिक संबंध बनाये। दोषी को गत 31 अक्टूबर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल की अदालत ने दोषी करार दिया और 1 नवंबर को 12 वर्ष के कारावास और 27 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके अलावा पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से 1.75 लाख की धनराशि प्रतिकर योजना के तहत दिलाने के आदेश दिये थे।
पीड़िता को क्षतिपूर्ति राशि न दे पाने पर स्टेट बैंक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल के आदेश पर दिव्यांग दुराचार पीड़िता के लिए भेजी गई अंतरिम क्षतिपूर्ति राशि सात माह बीतने के बाद भी उसके खाते में स्थानांतरित नहीं हुई है। उल्टे मामला चर्चा में आने के बाद स्टेट बैंक ने धनराशि को 7 माह के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को लौटा दिया है। बहाना बनाया है कि पीड़िता के नैनीताल बैंक के खाते में किसी समस्या के कारण धनराशि नहीं भेजी जा सकी। जबकि पीड़िता की भाभी का कहना है कि उसके उसी बैंक खाते में अन्य योजनाओं की धनराशि लगातार आ रही है। आज शुक्रवार को उसने इस बैंक खाते में धनराशि जमा करके भी बैंक खाते में कोई समस्या न होने की पुष्टि की है।
जिला न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने वाले जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने बताया कि शुक्रवार को स्टेट बैंक की नैनीताल शाखा ने 7 माह बाद पीड़िता के खाते में भेजने के लिये दी गयी 1.75 लाख की धनराशि को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को वापस लौटा दिया है, जबकि आज ही पीड़िता की भाभी ने बैंक खाते में 200 रुपये जमा करके खाते में कोई समस्या न होने की पुष्टि की है।
उल्लेखनीय है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मार्च 2025 में 1.75 लाख रुपये की सहायता राशि एसबीआई को भेज दी गई थी, जो पीड़िता के खाते में भेजने की जगह स्टेट बैंक ने वापस लौटा दी है।