मेडिकल लीव और कार्यग्रहण जैसे मामलों में याचिका पर हाईकोर्ट ने जताया आश्चर्य

जयपुर, 09 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी को कार्यग्रहण नहीं कराने से जुडे मामले में आश्चर्य जताते हुए कहा कि अब मेडिकल लीव और कार्यग्रहण जैसे मुद्दों पर भी हाईकोर्ट में याचिकाएं पेश कर रही हैं, जबकि ऐसे मामलों को स्थानीय स्तर पर ही निपटाया जा सकता है। यह वास्तव में आश्चर्यजनक है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के अफसरों से अपेक्षा है कि वे ऑफिशियल ड्यूटी और ह्यूमन ड्यूटी के बीच संतुलन रखे। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित एसडीओ को शपथ पत्र पेश कर बताने को कहा है कि उसने याचिकाकर्ता कर्मचारी को कार्यग्रहण क्यों नहीं कराया। वहीं अदालत ने मामले में प्रमुख राजस्व सचिव और उपखंड अधिकारी, सपोटरा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश अशोक कुमार की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता करौली जिले के सपोटरा उपखंड में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। दिसंबर, 2025 के अंत में उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई और वह ऑफिस नहीं आ पाया। उसने ऑफिस में सूचना देकर 12 जनवरी 2026 को मेडिकल सिकनेस व फिटनेस प्रमाणपत्र के साथ कार्यग्रहण की सूचना संबंधित एसडीओ को दे दी। इसके बावजूद एसडीओ ने उसे न तो कार्यग्रहण करने दिया और न ही हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करने दी। इसके अलावा उसके दस्तावेजों को भी खुद के पास ही रख लिया और उसे अपनी मर्जी से गैर हाजिर बताकर 17 सीसीए का नोटिस भी दे दिया। याचिका में कहा गया कि वह मेडिकल अवकाश पर था और इसकी सूचना भी अपने कार्यालय में दे दी थी। वह मर्जी से नहीं बल्कि बीमारी के चलते ऑफिस नहीं आ पाया था। इसलिए उसे कार्यग्रहण करवाया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए एसडीओ से शपथ पत्र पेश कर इसका कारण बताने को कहा है।