शिमला, 06 फ़रवरी । पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने लोकसभा में हालिया घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद का स्तर गिरना देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब लोकसभा में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा और शर्म से आंखें झुक गईं।
शांता कुमार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री लोकसभा में आकर अपना भाषण भी नहीं दे सके, क्योंकि उन पर हमले की आशंका जताई गई थी। लोकसभा अध्यक्ष को मिली सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आधार पर प्रधानमंत्री को सदन में आने से मना किया गया। इस दौरान सदन में मोदी तेरी क़ब्र खुदेगी जैसे नारे लगाए गए, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा एक सदस्य को गद्दार कहे जाने की भी घटना सामने आई। उन्होंने कहा कि लोकसभा के इतिहास में ऐसा व्यवहार पहले कभी नहीं देखा गया।
92 वर्ष की आयु में अपने सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए शांता कुमार ने कहा कि उन्होंने 33 वर्ष विधायक, लोकसभा व राज्यसभा सदस्य के रूप में बिताए हैं। वे दो बार मुख्यमंत्री और दो बार केंद्रीय मंत्री रहे हैं। इसके अलावा सांसदों के शिष्टमंडल के साथ 15 दिनों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ (न्यूयॉर्क) भी गए और विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंचों पर तीन बार भाषण देने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अपने पूरे जीवन में वे कभी भी लोकसभा के भीतर हुए ऐसे व्यवहार से इतना शर्मिंदा नहीं हुए।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि अटल जी कहा करते थे कि दलों की दीवारें बहुत नीची होती हैं, लेकिन राष्ट्र का मंदिर बहुत ऊंचा होता है। दलों की दीवारों में मत रहा करो।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे आत्मनिरीक्षण करें और लोकसभा के गिरते स्तर को बचाने के लिए गंभीरता से सोचें। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से लोकसभा अब शौर-सभा बनती जा रही है। इस तरह के आचरण ने पूरे विश्व के सामने भारत के 140 करोड़ नागरिकों को शर्मसार किया है।