श्रीमद्भागवत कथा से भवसागर पार होता है: आचार्य व्योम त्रिपाठी

प्रख्यात कथावाचक आचार्य व्योम त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मानव जीवन को आध्यात्मिक दिशा देता है और व्यक्ति भवसागर से पार होता है। कथा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का समन्वय होता है, जिससे मनुष्य के अंतर्मन में शांति और सदाचार का विकास होता है।

आचार्य त्रिपाठी ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-प्रबंधन का शास्त्र है। इसमें वर्णित श्रीकृष्ण की लीलाएं, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव और गोपियों की कथाएं मानव को धैर्य, करुणा, सेवा और समर्पण का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि नियमित श्रवण से अहंकार का क्षय होता है और ईश्वर-भक्ति में स्थिरता आती है।

कथा के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक जीवन की आपाधापी में श्रीमद्भागवत कथा मानसिक संतुलन और नैतिक बल प्रदान करती है। परिवार और समाज में सद्भाव बढ़ाने में भी इसका विशेष योगदान है।