कैथल जिले में जांच एजेंसियों के नाम पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लोगों से ठगी किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इसको लेकर पुलिस अधीक्षक उपासना ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और मानसिक दबाव बनाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं।
एसपी उपासना के अनुसार, ठग फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को यह कहकर धमकाते हैं कि वे किसी गंभीर अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल हैं। इसके बाद पीड़ित को तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी जाती है। डर के माहौल में लोग ठगों के बताए बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट में रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। न ही कोई एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी करती है। ऐसे कॉल पूरी तरह से फर्जी और ठगी का हिस्सा होते हैं।
एसपी उपासना ने नागरिकों को सलाह दी कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण या ओटीपी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को जांच अधिकारी बताकर धमकाए, तो घबराने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जनता की सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। कैथल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते ठगी को रोका जा सके और अपराधियों को पकड़ा जा सके।