आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा, सदस्य सुरेंद्र सिंह और सदस्य लियाकत अली की पीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जो विद्युत विभाग ने जिला उपभोक्ता आयोग जैसलमेर के निर्णय के विरुद्ध दायर की थी। मामले में परिवादिया नजमा बानो ने शिकायत की थी कि मार्च 2021 में उनके बिजली बिल में बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के 1,61,227 रुपये का बकाया जोड़ दिया गया, जो उनके पति नवाबुद्दीन के एक अन्य भूखंड पर लिए गए कनेक्शन से संबंधित था। परिवादिया का कहना था कि यह राशि पांच वर्ष पुराने बकाया से जुड़ी है, जिसकी वसूली विद्युत अधिनियम की धारा 56(2) के तहत दो वर्ष बाद नहीं की जा सकती।
विभाग ने दिया तर्क : विद्युत विभाग का तर्क था कि नजमा बानो के पति द्वारा लिया गया पुराना कनेक्शन भी उसी क्षेत्र में था, और चूंकि वह वर्तमान व्यवसाय भी उन्हीं द्वारा संचालित बताया गया, इसलिए पत्नी के कनेक्शन में बकाया जोड़ा गया। विभाग ने पति-पत्नी को एक इकाई मानते हुए वसूली को उचित ठहराया। हालांकि आयोग ने विभाग की दलीलें अस्वीकार करते हुए कहा कि पति और पत्नी के दोनों कनेक्शन अलग-अलग परिसरों में स्थित हैं, तथा विभाग ऐसा कोई नियम प्रस्तुत नहीं कर सका जिसमें पति के बकाया को पत्नी के बिल में जोडऩे का प्रावधान हो।
आयोग ने कहा- मनमानी वसूली : आयोग ने मंडल आदेश कमर्शियल 247 का हवाला देते हुए इसे मनमानी वसूली बताया। इस आधार पर राज्य आयोग ने विद्युत विभाग की अपील खारिज करते हुए जैसलमेर जिला आयोग के निर्णय को सही ठहराया। मामले में विद्युत विभाग की ओर से अधिवक्ता प्रदीप शर्मा की ओर से मुकेश कच्छवाहा उपस्थित हुए।