चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर वायुसेना का सैन्यभ्यास शुरू

उत्तरकाशी, 05 फ़रवरी । सीमांत से लगे उत्तरकाशी जनपद में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर वायुसेना ने एक बार पुनः तीन दिवसीय सैन्य अभ्यास शुरू हो गया है।

चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी के निमार्ण एजेंसी के समन्वयक मुकेश नौटियाल ने बताया कि वायु सेना ने बुधवार से तीन दिवसीय अभ्यास शुरू किया जो 6 फरवरी तक चलेगा।

बहुउद्देश्यीय परिवहन विमान एएन-32 की लैंडिंग और टेकऑफ का तीन बार अभ्यास किया।

गौरतलब है कि सीमांत जनपद उत्तरकाशी की सीमा चीन सीमा से सटी हुई है। उत्तरकाशी जनपद भारत – चीन सीमा से सीधे जुड़े होने और अत्यधिक ऊंचाई के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील व महत्वपूर्ण है। जो इसे सैन्य आवाजाही , गस्त , हवाई अभ्यास और गंगोत्री – यमुनोत्री जैसी रण नीतिक घाटियों की सुरक्षा के लिए प्रमुख बनाता है।

उत्तरकाशी जनपद चीन के साथ एक लंबी और दुर्गम अंतरराष्ट्रीय

सीमा साझा करता है जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत अहम है

इसलिए उत्तरकाशी का चिन्यालीसौड़ एयरपोर्ट वायुसेना के लिए सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि वायुसेना पिछले कुछ समय से इस हवाई अड्डे को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के तौर पर विकसित करने पर काम कर रही है।

इसी के चलते वायुसेना समय-समय पर यहां अपने बहुउद्देश्यीय विमानों के साथ ही हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास करती है।

माना जा रहा है कि यह अभ्यास सीमावर्ती एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए किया जा रहा है, जिससे विपरीत परिस्थितियों में वायुसेना पूरी क्षमता व मजबूती के साथ काम कर सके। इससे पूर्व भारतीय वायुसेना ने

दिसंबर 2025 एवं ऑपरेशन गगन का अभ्यास कर चुकी हैं।

1984 में वायुसेना का हिस्सा बना था एएन 32

एएन-32 विमान सोवियत मूल का एक दो इंजन वाला, बहुउद्देशीय, सामरिक हल्का सैन्य परिवहन विमान है, जिसे मुख्य रूप से भारतीय वायु सेना के लिए यूक्रेन के एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया था। यह 1984 से भारतीय वायु सेना की सेवा में एक विश्वसनीय ‘वर्कहॉर्स’ (प्रमुख विमान) रहा है।

सबसे पहले यहा आगरा एयरफोर्स स्टेशन पर आया था‌ एएन-32 विमान से तभी से पैरा ड्रॉपिंग ट्रेनिंग कराई जा रही है। भारत की अलग-अलग फोर्स में कमांडो हैं। उन्हें यहां पर ही ट्रेनिंग कराई जाती है। मार्कोस कमांडो, गुरूण कमांडो, पैरा कमांडों की ट्रेनिंग कराने में एएन-32 की अहम भूमिका रही है। आगरा में एक दिन में एएन-32 से सबसे ज्यादा 1461 जंप कराई गई।यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है।