उत्तरकाशी, 11 जनवरी । लगातार बारिश की कमी और घटती बर्फबारी के कारण देश के प्रमुख सेब उत्पादक इलाकों में सूखे का गंभीर असर देखने को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में सेब के बागवान गहरे संकट से जूझ रहे हैं। मौसम में आए बदलाव ने सेब की पैदावार, गुणवत्ता और किसानों की आय—तीनों पर असर डाला है।
बागवानों के अनुसार, सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी न होने से चिलिंग आवर्स पूरी नहीं हो पा रहीं, जो सेब के पौधों के लिए बेहद जरूरी होती हैं। इसका सीधा असर फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है। कई इलाकों में पौधों पर फूल कम आए हैं, जिससे इस साल उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है।
सूखे की वजह से मिट्टी में नमी की भारी कमी हो गई है। छोटे और मध्यम किसान, जिनके पास सिंचाई के सीमित साधन हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई बागवानों को टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है और मुनाफा कम होने की चिंता सताने लगी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। अनियमित बारिश और कम बर्फबारी अब सामान्य होती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में सेब की खेती और भी मुश्किल हो सकती है।
बागवान सरकार से राहत पैकेज, सिंचाई योजनाओं के विस्तार और फसल बीमा को प्रभावी बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो कई किसान सेब की खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं। राज्य सरकारों ने स्थिति पर नजर रखने और प्रभावित किसानों को सहायता देने का भरोसा दिलाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान की जरूरत बनी हुई है।