नैनीताल, 14 फ़रवरी । उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के भीमताल विकासखंड अंतर्गत पिनरों गांव की ऊंची पहाड़ी पर स्थित ‘छोटा कैलाश’ मंदिर शिवभक्तों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कैलाश और आदि कैलाश जैसी आकृति वाली इस ऊंची चोटी पर स्थापित शिव मंदिर में प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
रविवार को महाशिवरात्रि पर्व के दृष्टिगत यहां विशेष आयोजन हो रहे हैं। नैनीताल पुलिस ने इस अवसर के वाहनों के आवगमन को प्रतिबंधित करते विशेष यातायात योजना भी जारी की है, और श्रद्धालुओं से सार्वजनिक अथवा दोपहिया वाहनों से आने की अपील की है।
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव का ध्यान करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि यह स्थल धार्मिक पर्यटन के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए अंतिम चरण में लगभग तीन से चार किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जो श्रद्धा के साथ शारीरिक सहनशक्ति की भी परीक्षा लेती है।
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार माता पार्वती से विवाह के बाद भगवान शिव ने इस स्थान पर विश्राम किया था। कुछ लोगों का विश्वास है कि महादेव ने यहीं से राम और रावण के युद्ध का दृश्य देखा था। मंदिर परिसर में खुले आकाश के नीचे स्थापित शिवलिंग लंबे समय तक बिना संरचना के रहा। वर्तमान मंदिर का निर्माण लगभग 25 वर्ष पूर्व हुआ बताया जाता है। यहां अखंड धूनी भी निरंतर प्रज्वलित रहती है, जिसे विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है।
ग्राम पंचायत जंगलिया गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित छोटा कैलाश में मेले का शुभारंभ शनिवार को विधि-विधान के साथ किया गया। भीमताल ग्राम प्रधान संगठन की संरक्षक राधा कुल्याल ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है। ग्राम प्रधान ने बताया कि जंगलिया गांव के ग्रामीणों की ओर से घुघुसा स्थल पर प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आलू-पूड़ी, चने, जूस और फलाहार वितरित किया जाएगा। साथ ही भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा। प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं से शांति एवं सुव्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है।