अकाल तख्त में होने वाले फैसले का समय बदला गया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का अकाल तख्त में पेश होना समय बदला गया है. नई कार्यक्रम-सारिणी के अनुसार वह 15 जनवरी को शाम साढ़े चार बजे आएंगे. यह बदलाव अकाल तख्त सचिवालय के स्पष्ट निर्देश के बाद किया गया है. बताया गया है कि मान के बयानों और वायरल वीडियो के स्पष्टीकरण के लिए यह कदम उठाया गया है. पहले 15 जनवरी की सुबह 10 बजे का प्लान बना था, जो अब नहीं रहेगा.
अकाल तख्त के प्रवक्ता ने कहा कि यह परिवर्तन मान के दावों और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो की सत्यता पर स्पष्टता लाने के लिए किया गया है. सुरक्षा और मानक प्रक्रियाओं के अनुसार यह निर्णय लिया गया है. यह भी कहा गया कि आयोजन-तालिका में समय-सारिणी बदलाव सामान्य प्रशासनिक कदम है. राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रिया के हिसाब से इसे संतुलित प्रयास माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषक भी इसे सरकार-धर्म के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश बताते हैं. अकाल तख्त ने स्पष्ट किया है कि यह आवेदनिक कदम है, न कि किसी प्रतिनिधि-स्थिति की कमी göst. मान के समर्थक इसे धार्मिक मानदंड के अनुरूप मानते हैं और इसकी व्याख्या धीरे-धीरे सामने आएगी.
बयान के अनुरूप स्पष्टीकरण के लिए कदम
अकाल तख्त की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह निर्णय स्पष्टीकरण के लिए लिया गया है. स्थिति का सत्यापन और सबूतों की पुष्टि जरूरी है. अकाल तख्त ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही होगी. मान ने कहा था कि अमृतसर में राष्ट्रपति मुर्मु का कार्यक्रम है, पर वे उसमें शामिल नहीं होंगे और अकाल तख्त में पेश होंगे. इस बयान के पीछे का उद्देश्य भी यही है कि घटनाक्रम पूरी पारदर्शिता के साथ चले.
मान ने पहले संकेत दिया था कि राष्ट्रपति कार्यक्रम से वही दिन इतराने की योजना है, पर अब सचिवालय में उपस्थिति तय है. यह स्पष्ट होता है कि लाइव टेलीकास्ट का विषय अभी बन रहा है, और जटिलताओं के बीच रिकॉर्डिंग के तरीके भी विशेषज्ञों की निगरानी में होंगे. विषय-वस्तु के लिहाज से यह मामला काफी संवेदनशील बना रहा है. इस क्रम में जत्थेदार से अभी तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया अटक कर रही है.
सीएम मान की व्यक्तिगत स्थिति और प्रशासनिक निर्देश
सीएम भगवंत मान अमृतधारी सिक्ख नहीं हैं, इसलिए उन्हें अकाल तख्त के फैसले की जगह सचिवालय में पेश होने के लिए कहा गया है. जत्थेदार से लाइव टेलीकास्ट की मांग मान ने की थी ताकि सबूतों के साथ निर्णय दिखाया जाए; लेकिन इस पर जत्थेदार की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. यह दिखाता है कि नियमों का पालन अब भी शीर्ष प्राथमिकता पर है. माना जा रहा है कि सचिवालय में प्रस्तुति से प्रक्रियागत शान्ति बनी रहेगी.
मान के समर्थक इसे धर्म-सम्बंधी संवेदनशीलता के साथ देख रहे हैं. राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यह कदम आगामी राजनीतिक संदेशों को संतुलित कर सकता है. सचिवालय प्रस्तुति से आचरण-सम्बन्धी प्रश्नों के जवाब स्पष्ट होंगे. इस घटनाक्रम के साथ स्थानीय समर्थकों की प्रतिक्रिया भी पक्ष-पर पक्ष बदली हुई दिखेगी.
आगे की राह और संदर्भ
यह बदलाव पंजाब की राजनीति और धार्मिक मंचों के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश मानी जा रही है. आगे क्या होगा, इसे लेकर कयास जारी हैं. निर्णय के साथ आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवहार और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं अहम रहेंगी. ताजा अपडेट के लिए देखें NDTV और The Tribune.
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