बाद उन्हें पूछताछ के लिए अंदर भेजा गया।
जानकारी के अनुसार यह
मामला आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़ा हुआ है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो पहले
ही रमन अरोड़ा को इस मामले में गिरफ्तार कर चुका है। विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर
के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की
जांच शुरू की है।
रमन अरोड़ा पर
दुकानदारों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कथित तौर पर अवैध वसूली करने के
आरोप भी लगे हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ 1.10 करोड़ रुपये की संपत्ति से संबंधित
मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत
में भेजा था।
आरोप है कि रमन
अरोड़ा ने सहायक टाउन प्लानर (एटीपी) सुखदेव वशिष्ठ के साथ मिलकर कथित रूप से अवैध
नोटिस जारी करवाए। इन नोटिसों के जरिए भवन मालिकों को सीलिंग और तोड़फोड़ की
कार्रवाई की धमकी दी जाती थी तथा मामले वापस लेने या निपटाने के बदले धन की मांग
की जाती थी।
अधिकारियों के अनुसार
ईडी ने विधायक को 2 जून
को जालंधर कार्यालय में तलब किया था, जहां पीएमएलए के तहत उनका बयान दर्ज किया जाना था। मामले की
जांच जारी है और एजेंसियां वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही
हैं।