उत्तरकाशी, 30 जनवरी । पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्या हाल हैं, इसका अनुमान चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य को देखकर लगाया जा सकता है। ये अस्पताल पिछले वषों से रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। यहां पर एक भी विशेषज्ञ डॉ नहीं है ।अस्पताल में सुविधाएं न होने के कारण हर रोज आम बीमारी से ग्रसित मरीज को भी हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि प्रतापनगर, थौलधार विकास खण्ड के साथ-साथ दिचली गमरी, दशगी, भंडास्यू पट्टियों के हजारों लोगों के इलाज का एकमात्र सहारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) चिन्याली सौड़ आज खुद “बीमार व्यवस्था” से जूझ रहा है। हैरानी की बात यह है कि भारी मरीज दबाव के बावजूद यह केन्द्र वर्षों से डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी के सहारे किसी तरह चलाया जा रहा है।
वहीं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी विनोद कुकरेती ने बताया कि वर्तमान समय में पांच डॉक्टर है लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। उन्होंने बताया कि गायनोकोलॉजिस्ट का पद भी खाली है।
स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार सीएचसी चिन्यालीसौड़ में स्टाफ नर्स के 10, मेडिकल ऑफिसर के 6, फिजिशियन, ऑर्थोपैडिक सर्जन और गायनोकोलॉजिस्ट के एक-एक पद सहित कुल मिलाकर कई अहम पद स्वीकृत हैं। लेकिन हकीकत यह है कि मौजूदा समय में यहां केवल 5 स्टाफ नर्स, 2 वार्ड बॉय, 1 वार्ड आया, 2 फार्मासिस्ट, 3 एएनएम, 1 डेंटिस्ट, 1 डेंटल हाइजीनिस्ट और 1 डॉट्स सुपरवाइजर के सहारे पूरा स्वास्थ्य केन्द्र चलाया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी विशेषज्ञ डॉ न होने से स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। दिचली, गमरी, दशगी, भंडास्यू के साथ-साथ प्रतापनगर और थौलधार क्षेत्र से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए चिन्याली सौड़ पहुंचते हैं, लेकिन संसाधनों और डॉक्टरों की कमी के चलते अधिकांश गंभीर रोगियों को सीधे जिला अस्पताल या देहरादून रेफर कर दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “यह अस्पताल अब इलाज का केन्द्र नहीं, सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है।”
लंबे समय से क्षेत्र के जनप्रतिनिधि चिन्याली सौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को उप जिला चिकित्सालय बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। इसी कारण लोगों में लगातार रोष बढ़ता जा रहा है।
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज कोहली और ब्लॉक प्रमुख रणवीर महन्त का कहना है कि चिन्याली सौड़ सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय बनाए जाने के लिए सरकार को तत्काल प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक स्वीकृत पदों के सापेक्ष डॉक्टरों और कर्मचारियों की तैनाती नहीं होती, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा।
अब सवाल यह है कि हजारों की आबादी वाले इस पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को आखिर कब मिलेगा इलाज का भरोसा?
या फिर चिन्याली सौड़ का यह अस्पताल यूं ही वर्षों तक डॉक्टरों का इंतजार करता रहेगा।