बरनाला-मानसा मार्ग पर पर्यावरण घोटाला, हाई कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाईं
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के सख्त आदेशों को दरकिनार करते हुए बरनाला-मानसा मुख्य मार्ग पर गांव धौला से धूरकोट के कच्चे रास्ते को पक्का करने के नाम पर बड़ा पर्यावरण घोटाला सामने आया है। विकास की आड़ में रातों-रात दशकों पुराने सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। यह मनमानी हाई कोर्ट के उस आदेश के बावजूद की गई, जिसमें किसी भी उम्र के हरे पेड़ को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध है। लोक निर्माण विभाग (PWD) को बजट मिलते ही सड़क के दोनों किनारों पर खड़े 40 से 50 साल पुराने नीम, पीपल, टाहली और शहतूत के पेड़ काटे गए। पर्यावरण प्रेमियों ने इसे गंभीर घोटाला करार दिया है।
हाई कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश और नियमों की अनदेखी
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 24 दिसंबर 2025 को पूरे राज्य में किसी भी उम्र के हरे पेड़ को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इस ऐतिहासिक आदेश का सीधा उल्लंघन करते हुए वीआईपी प्रोजेक्ट में नियमों को ताक पर रखा गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ये पेड़ रास्ते में बाधा नहीं थे। प्रशासन ने लकड़ी माफिया के साथ मिलीभगत की। पर्यावरण प्रेमियों ने डिप्टी कमिश्नर (DC) बरनाला से मांग की है कि एसडीएम (SDM) की ड्यूटी लगाकर जांच कराई जाए। एसडीएम काटे गए पेड़ों के ठूंठों की गिनती करें और दोषी अधिकारियों को बेनकाब करें। अगर स्थानीय स्तर पर मामला दबाया गया तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में शिकायत की जाएगी।
वन विभाग ने गठित की विशेष जांच टीम
इस अवैध कटाई का मामला वन विभाग के पंजाब मुख्यालय तक पहुंच चुका है। मुख्य वनपाल धर्मेंद्र शर्मा और पटियाला सर्कल के वनपाल अजीत कुलकर्णी ने माना कि हाई कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए विशेष जांच टीम (SIT) को धौला-धूरकोट मार्ग पर भेजा है। यह टीम जमीन में बचे पेड़ों के ठूंठ और वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा करेगी। इसके बाद अवैध कटाई करने वाले माफिया और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह बड़ी कार्रवाई है।
पर्यावरण प्रेमियों की चेतावनी और भविष्य की कार्रवाई
पर्यावरण प्रेमियों ने इस घोटाले पर कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जांच में देरी हुई तो वे NGT और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। यह मामला सिर्फ पेड़ों की कटाई का नहीं, बल्कि कानून के शासन पर हमला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों को सजा दी जाए। वन विभाग की SIT जल्द रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू होगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त कानून और निगरानी की जरूरत है।
पंजाब सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर इस मामले की और जानकारी मिल सकती है। साथ ही, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की वेबसाइट पर पर्यावरण उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।