धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व: गांव वाले सुरक्षित, विस्थापन सिर्फ स्वैच्छिक

जयपुर, 03 फ़रवरी । वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में साफ कर दिया कि धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व में आने वाले गांवों के निवासियों को उनकी सहमति के बिना विस्थापित नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि रिजर्व के अंतर्गत बंजर भूमि पर जो लोग खेती कर रहे हैं, उनके लिए कोई मुआवजा प्रावधान नहीं है। यानी अगर जमीन बंजर है और आप उस पर खेती कर रहे हैं, तो सरकार आपको पैसों की गारंटी नहीं दे रही। लेकिन, अगर बात मानव और वन्य जीव संघर्ष (कॉन्फ्लिक्ट) की हो, तो राहत है। वर्ष 2022 के आदेश के तहत इस तरह के दुर्घटना में मृतक के परिवार को पांच लाख रुपये मिलते थे। अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशीलता के चलते यह राशि 10 लाख रुपये तक बढ़ाने पर विचार चल रहा है।

मंत्री ने बताया कि धौलपुर-करौली में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) का निर्धारण सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट के बाद ही हुआ है। इसी क्रम में अलवर के सारिस्का टाइगर रिजर्व में दो बाघिनों के संघर्ष में एक बाघिन की मृत्यु हो गई थी, जिसका सम्मानपूर्वक दाह संस्कार किया गया।

शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। भविष्य में अगर किसी गांव में विस्थापन होगा, तो राज्य सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।