चित्तौड़गढ़, 19 फ़रवरी । जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय में पिछले कई दिनों से नर्सिंग के छात्र आन्दोलनरत है और उन्हें अपने भविष्य की चिन्ता सता रही है। आन्दोलन कर छात्रों का आरोप है कि मेवाड़ विश्वविद्यालय के पास जीएनएम नर्सिंग एवं बीएससी नर्सिंग कराने की कोई मान्यता नहीं है, जबकि विश्वविद्यालय प्रबंधन इस आरोप को नकार रहा है। राज्य सरकार के स्तर पर सारी कागजी खानापूर्ति होने के बाद मान्यता का प्रमाण पत्र अब तक जारी नहीं किया गया। जबकि वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में राजस्थान सरकार की काउंसलिंग से ही यहां पर नर्सिंग में विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। जब सरकार की काउंसलिंग सूची में मेवाड़ विश्वविद्यालय का नाम शामिल है और सरकार स्वयं नर्सिंग विद्यार्थियों को प्रवेश दिला रही है तो फिर मान्यता का प्रमाण पत्र क्यों नहीं जारी किया गया। हाल ही में एक अन्य उदयपुर के नर्सिंग कॉलेज के मामले में भी राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर की पीठ ने सरकार को इस तरह के मामले में आठ सप्ताह में निस्तारण करने के आदेश दिए है।
मेवाड़ विश्वविद्यालय के चैयरपर्सन अशोक गदिया ने बताया कि वर्ष 2022-23 में जब हमने नर्सिंग कोर्स में प्रवेश प्रारंभ किया, उस समय हमारे पास सक्षम प्राधिकारी एवं न्यायालय के आदेश उपलब्ध थे। उन्हीं आदेशों के तहत 2022-23 तथा 2023-24 में प्रवेश लिए गए। इसके बाद 2024-25 और 2025-26 में भी राजस्थान सरकार के निर्देशों एवं न्यायालय के आदेशों के अनुसार ही प्रवेश प्रक्रिया संपन्न की गई। जब विषय न्यायालय में प्रस्तुत हुआ, तब न्यायालय ने विश्वविद्यालय के पक्ष को सुनने के बाद आदेश दिया कि मेवाड़ विश्वविद्यालय को एनओसी प्रदान की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि सरकार को किसी प्रकार की आपत्ति हो तो 30 दिनों के भीतर पुन: निरीक्षण कराया जाए। सरकार द्वारा निर्धारित अवधि में कोई पुन: निरीक्षण नहीं कराया गया और न ही एनओसी जारी की गई। इस प्रकार न्यायालय के आदेश के अनुसार एनओसी स्वीकृत मानी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025 में जब सरकार द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर सभी नर्सिंग संस्थानों को एनओसी के लिए पुन: आवेदन करने को कहा गया तब मेवाड़ विश्वविद्यालय ने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन किया। इस मामले में जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति, जिसमें एडीएम सिटी सहित अन्य अधिकारी सम्मिलित थे ने हमारे परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी आवश्यक मानकों, अभिलेखों, अधोसंरचना एवं सुविधाओं की जांच की गई। निरीक्षण रिपोर्ट सरकार को प्रेषित कर दी गई। इस मामले में वर्तमान में यह मामला सरकार के स्तर पर लंबित है। हमें मौखिक रूप से अवगत कराया गया है कि सीएमओ कार्यालय से निर्देश प्राप्त होने तक फाइल को यथास्थिति में रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का अपना अधिनियम (एसीटी) जो विधानसभा से पारित है। उस अधिनियम के अंतर्गत नर्सिंग कोर्स संचालित करने का प्रावधान है। तकनीकी रूप से विश्वविद्यालय को एनओसी की आवश्यकता नहीं है, फिर भी पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत हमने सभी औपचारिकताएं पूरी की है।