पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एक कानूनगो और एक प्रिंसिपल को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
लुधियाना में प्रिंसिपल ने सर्टिफिकेट के बदले मांगी रिश्वत
लुधियाना के एक स्कूल के प्रिंसिपल गुरमीत सिंह को रिश्वत लेते पकड़ा गया। उन्होंने एक छात्र से डुप्लीकेट सर्टिफिकेट के लिए पैसे मांगे। सरकारी फीस केवल 900 रुपये थी। लेकिन प्रिंसिपल ने 15,800 रुपये की मांग रखी। विजिलेंस टीम ने उन्हें 6,000 रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। छात्र को कोविड काल में सर्टिफिकेट नहीं मिला था। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। पंजाब सरकार की शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में यहाँ अधिक जानें।
बलाचौर में कानूनगो ने ऑनलाइन ली रिश्वत
बलाचौर में कानूनगो रमन कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। उन पर जमीन की निशानदेही के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। अदालत ने शिकायतकर्ता के पक्ष में आदेश दिया था। कानूनगो ने काम को जटिल बताया। और 80,000 रुपये की मांग की। वह पहले ही 33,000 रुपये ले चुका था। इसमें 15,000 रुपये नकद और 18,000 रुपये ऑनलाइन लिए गए। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पर शिकायत मिली थी। ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच के बाद कार्रवाई हुई। भारत में भ्रष्टाचार रोकथाम के उपायों पर केंद्रीय सतर्कता आयोग की वेबसाइट देखें।
पंजाब सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर
पंजाब सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है। विजिलेंस ब्यूरो लगातार निगरानी कर रहा है। आम लोगों से शिकायतें मिल रही हैं। हर मामले की गहन जांच की जा रही है। इससे भ्रष्ट अधिकारियों में डर का माहौल है। सरकार का लक्ष्य पारदर्शिता लाना है। नागरिकों का विश्वास जीतना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
ये गिरफ्तारियां एक स्पष्ट संदेश देती हैं। भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आम जनता को ऐसी कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए। एक स्वच्छ प्रशासन ही राज्य के विकास की कुंजी है।
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