शिमला, 05 जून । पर्यावरण संरक्षण की बात अक्सर सरकारी योजनाओं और बड़े अभियानों के संदर्भ में होती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के कुछ स्कूलों ने यह दिखा दिया है कि बदलाव की शुरुआत कक्षा और स्कूल परिसर से भी हो सकती है। विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को राज्य के सात स्कूलों को उनके पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों और लगातार प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम (जीएसपी) रोलिंग ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। इन स्कूलों ने पानी बचाने, कचरे के बेहतर प्रबंधन, सौर ऊर्जा के इस्तेमाल, हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है।
राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान चंबा जिले को भी राज्य का सर्वश्रेष्ठ ग्रीन जिला घोषित किया गया। यह सम्मान जिले के स्कूलों की बड़ी भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी सक्रिय भूमिका के लिए दिया गया।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले स्कूलों में चंबा का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चनेड़ शामिल है, जिसने पहली बार ग्रीन स्कूल्स ऑडिट में हिस्सा लिया और सीधे ग्रीन रेटिंग हासिल कर ‘न्यूकमर अवार्ड’ अपने नाम किया। सोलन जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओच्छघाट को ‘चेंजमेकर अवार्ड’ मिला। स्कूल को पर्यावरणीय गतिविधियों में लगातार सुधार और निरंतर प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
सोलन के ही बी.एल. सेंट्रल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कुनिहार को ‘एयर मैनेजर अवार्ड’ दिया गया। स्कूल ने प्राकृतिक रोशनी के अधिक उपयोग और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देकर ऊर्जा की बचत और बेहतर वातावरण बनाने में योगदान दिया। वहीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रथा को ‘एनर्जी मैनेजर अवार्ड’ मिला। स्कूल ने सौर ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी काम किया।
कांगड़ा जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बांदोल को ‘लैंड मैनेजर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। स्कूल ने पौधारोपण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दिया। चंबा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय होबार को जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए ‘वाटर-वाइज अवार्ड’ मिला। स्कूल ने वर्षा जल संचयन और पानी के पुनः उपयोग जैसी पहलें अपनाईं। वहीं चंबा के ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खरगाट को ‘वेस्ट वॉरियर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। स्कूल ने कचरे के पृथक्करण, कम्पोस्टिंग और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर एक मिसाल पेश की।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के “फेफड़ों” की तरह है और यहां के जंगल तथा नदियां करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अधिक पेड़ लगाने, पानी बचाने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील की।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के पर्यावरण शिक्षा इकाई के कार्यक्रम प्रबंधक नीरज कुमार के अनुसार वर्ष 2025-26 के राष्ट्रीय ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम ऑडिट में हिमाचल प्रदेश के 321 स्कूलों ने भाग लिया था। इनमें से 35 स्कूलों को ग्रीन रेटिंग प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि सम्मानित स्कूल इस बात का उदाहरण हैं कि पर्यावरण शिक्षा को व्यवहार में उतारकर किस तरह ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
सीएसई के अनुसार एक ‘ग्रीन स्कूल’ वह माना जाता है जो प्राकृतिक रोशनी का अधिक उपयोग करे, सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पैदल चलने जैसी टिकाऊ परिवहन व्यवस्थाओं को बढ़ावा दे, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करे, स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाकर हरित क्षेत्र बढ़ाए, वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल उपचार की व्यवस्था करे तथा अधिकांश कचरे का पुनर्चक्रण और जैविक कचरे का कम्पोस्ट तैयार करे।