पंजाब कांग्रेस में बढ़ी नाराजगी, मनीष तिवारी का तंज
पंजाब कांग्रेस में हाईकमान के बदलाव के बाद नाराजगी बढ़ गई है। चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी ने किनारे किए जाने पर सोशल मीडिया पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “काश मेरे पास असुरक्षा का कोई प्रतिरोधक होता।” हालांकि उन्होंने कहा कि 45 वर्षों में कांग्रेस ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। उन्होंने अपना युवा जीवन पार्टी की सेवा में लगाया है। कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया पर पार्टी में खींचतान बढ़ गई है।
वहीं सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने से चरणजीत चन्नी और सुखजिंदर रंधावा नाराज हैं। दोनों नेताओं ने अभी तक हाईकमान को धन्यवाद नहीं दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट भी नहीं डाली। चरणजीत चन्नी खुद प्रधान पद चाहते थे। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार इस पर रजामंदी भी हो चुकी थी। लेकिन आखिरी वक्त में जट्ट सिखों की नाराजगी के डर से वड़िंग को प्रधान रखा गया। रंधावा इसलिए नाराज हैं कि अगर जट्ट सिख ही प्रधान रखना था तो उन्हें क्यों नहीं बनाया गया।
बिट्टू का कांग्रेस पर तंज, पुराने विवाद की याद
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया है। उन्होंने ट्वीट किया कि जिनको कमेटियों में जगह नहीं मिली, वो खुद को कांग्रेसी न समझें। बिट्टू ने कहा कि चन्नी को प्रधान बनाने के लिए कई नेताओं ने चिट्ठी लिखी थी। अब वड़िंग को प्रधान रखने पर वो उनके साथ कैसे काम करेंगे। कांग्रेस के अंदरूनी विवाद पर यह नया मोड़ आया है।
दिलचस्प बात ये है कि 2022 के चुनाव जैसे हालात फिर बन रहे हैं। तब कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद नवजोत सिद्धू मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। लेकिन हाईकमान ने नहीं माना। इसके बाद सुखजिंदर रंधावा का नाम फाइनल हुआ तो सिद्धू नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि अगर जट्ट सिख सीएम बनेगा तो मैं बनूंगा वर्ना दूसरे वर्ग से बना दो। इसके बाद चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। नवजोत सिद्धू घर बैठ गए और प्रचार नहीं किया।
2022 की हार से डरी कांग्रेस, नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला
2022 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जुलाई 2021 में नवजोत सिद्धू को प्रधान बनाया। कुछ समय बाद चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। सिद्धू ने इससे नाराज होकर इस्तीफा दिया, लेकिन बाद में वापस ले लिया। चुनाव के दौरान सिद्धू और चन्नी गुट अलग-अलग दिखे। इसका खामियाजा पार्टी को हार मिली। इस बार कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन से डर गई। पार्टी को डर था कि वड़िंग को हटाने पर उनका गुट सिद्धू की तरह काम करेगा।
कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग का नया फॉर्मूला अपनाया है। दलित वोट बैंक पर सबसे बड़ा दांव लगाया गया है। पंजाब में 31% दलित वोट है। चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। जट सिख समुदाय को मुख्य कमान दी गई है। राजा वड़िंग को प्रधान और प्रताप बाजवा को एलओपी रखा गया है। हिंदू चेहरों को शहरों की कमान दी गई है। ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय को भी कमेटियों में जगह मिली है।
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