जयपुर, 31 जुलाई । राज्य सरकार ने प्रदेश में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त संग्रह व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिपत्र जारी किया गया है। परिपत्र के अनुसार अब राज्य में आयोजित सभी स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों में राजकीय ब्लड सेंटर 50 प्रतिशत रक्त का संग्रह करेंगे। इससे पहले यह व्यवस्था 20 प्रतिशत तक सीमित थी।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने से ब्लड रिप्लेसमेंट की आवश्यकता में कमी आएगी तथा प्रदेश में रक्त की उपलब्धता और सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि इससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सकेगा और उनके परिजनों को रक्त की व्यवस्था के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि राजकीय ब्लड सेंटर अपनी मेडिकल टीम के साथ स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों में पहुंचकर औषधियों एवं आवश्यक उपकरणों सहित औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप रक्त संग्रह की प्रक्रिया संपादित करेंगे। राठौड़ ने बताया कि 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर आयोजित रक्तदान शिविरों में केवल सिंगल ब्लड बैग में ही रक्त संग्रह की अनुमति होगी। यह व्यवस्था रक्त की गुणवत्ता बनाए रखने एवं उसके सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि विभाग ने प्रदेश के सभी ब्लड सेंटरों के चिकित्सा अधिकारी प्रभारियों को इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि जिन क्षेत्रों में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित हों, वहां राजकीय ब्लड सेंटर की टीम पहुंचकर 50 प्रतिशत रक्त का संग्रह करें।
उन्होंने कहा कि यदि इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है अथवा आवश्यकता के समय मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में कमी पाई जाती है, तो संबंधित ब्लड सेंटर की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. शुभमंगला ने बताया कि इस नई व्यवस्था से राजकीय ब्लड सेंटरों की सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी, रक्त संग्रह की गुणवत्ता एवं निगरानी और अधिक सुदृढ़ होगी तथा प्रदेश में सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।