जानें: पंजाब सरकार SC में, CBI जांच के खिलाफ अर्जेंट सुनवाई

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित कैश फॉर ट्रांसफर-पोस्टिंग करप्शन मामले की CBI जांच को चुनौती दी है। AAP सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने पंजाब सरकार की ओर से पैरवी की। उन्होंने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। यह विवाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद बढ़ा है, जिसमें CBI जांच के निर्देश दिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस

विकास सिंह ने कोर्ट से अर्जेंट लिस्टिंग की गुजारिश की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि आज संभव नहीं है। एडवोकेट सिंह ने कहा कि चुनाव के समय ऐसे मामलों को तूल दिया जा रहा है। उन्होंने विजय मदनलाल चौधरी के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह संघीय ढांचे के उल्लंघन का स्पष्ट मामला है। CJI ने कहा कि हम कल कोशिश करेंगे। अन्यथा परसों निश्चित रूप से सुनवाई होगी। यह बहस पंजाब सरकार की ओर से राज्य के अधिकारों पर सवाल उठाती है।

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने CM के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा। दो महीने में जांच रिपोर्ट मांगी गई। ED ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब पुलिस को कई पत्र भेजे गए। लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई। अगस्त में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। सितंबर में फैसला सुरक्षित रखा गया। अब CBI जांच का आदेश दिया गया है।

ED की भूमिका और कानूनी पेच

ED ने पंजाब पुलिस को कई पत्र भेजे थे। पंजाब पुलिस ने मामले को सीधे FIR में बदलने से इनकार किया। उसने ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से कानूनी राय मांगी। ED ने दोबारा कार्रवाई की मांग की। यह मामला राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसी के बीच टकराव को दर्शाता है। पंजाब सरकार का कहना है कि चुनावी मौसम में इस मुद्दे को बढ़ाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अब निर्णायक होगी। यह केस देखना होगा कि राज्य के अधिकार और CBI जांच के बीच संतुलन कैसे बैठता है।

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